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सोने की कीमतों ने बढ़ाई जूलर्स की मुश्किलें, मेटल लोन पर मार्जिन कॉल से संकट गहराया
By EditorialPublished on
सोने की कीमतों में लगातार तेजी से जूझ रहे ज्वेलरी उद्योग को अब एक और झटका लगा है। जनवरी से अब तक सोने की कीमतों में 15.7% की बढ़ोतरी हो चुकी है, जिससे मांग में भारी गिरावट आई है।
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मुंबई। सोने की कीमतों में लगातार तेजी से जूझ रहे ज्वेलरी उद्योग को अब एक और झटका लगा है। जनवरी से अब तक सोने की कीमतों में 15.7% की बढ़ोतरी हो चुकी है, जिससे मांग में भारी गिरावट आई है। इसी के चलते अब बैंकों द्वारा गोल्ड मेटल लोन पर मार्जिन कॉल की वजह से उद्योग तरलता (लिक्विडिटी) संकट से गुजर रहा है।
भारत के लगभग 20% ज्वेलर्स अपनी नकदी और स्टॉक की जरूरतों को पूरा करने के लिए बैंकों से गोल्ड मेटल लोन लेते हैं। इस प्रणाली में जूलर्स सीधे सोना खरीदने की बजाय बैंकों से 180 दिनों के लिए सोने की ईएमआई पर उधारी लेते हैं, उससे आभूषण बनाते हैं और बिक्री के बाद बैंकों को भुगतान करते हैं। खरीद और बिक्री के दाम के बीच का अंतर उनके लिए प्राकृतिक हेज का काम करता है।
भारत में गोल्ड मेटल लोन का कुल अनुमानित बाजार आकार 120 टन का है। कोटक बैंक के अध्यक्ष शेखर भंडारी ने बताया, “कीमतों में तेजी और बिक्री में गिरावट के चलते जूलर्स को मार्जिन कॉल के कारण तरलता की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि यह एक अस्थायी संकट है। जैसे ही ग्राहक ऊंचे दामों को स्वीकार करेंगे और शादी-ब्याह व त्योहारों की मांग फिर से शुरू होगी, स्थिति में सुधार आएगा।”
इस समय एक और चुनौती यह है कि गोल्ड लीज रेट्स (सोना उधार लेने की दरें) 3-4% से बढ़कर 6% से अधिक हो गई हैं। वैश्विक बुलियन बाजार में लिक्विडिटी की तंगी के चलते इन दरों में यह उछाल आया है।
जूलरी कारोबार में नकदी का संकट और बढ़ती लागत अब उद्योग के सामने दोहरी चुनौती बन गई है। लंदन स्थित बुलियन रिसर्च फर्म मेटल फोकस के प्रमुख सलाहकार चिराग शेठ ने कहा, “बड़े ब्रांड और संगठित जूलर्स स्टॉक बनाए रखने के लिए गोल्ड लोन पर निर्भर रहते हैं। लेकिन अब बैंक उन्हें लोन लेते समय की कीमत और वर्तमान कीमत के बीच का अंतर बतौर अतिरिक्त मार्जिन मांग रहे हैं, जिससे उनकी नकदी स्थिति कमजोर हो रही है। इसका असर उनकी लाभप्रदता (प्रॉफिटेबिलिटी) पर भी पड़ सकता है।”
गोल्ड लीज रेट्स में तेजी का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बुलियन बाजार में नकदी की कमी है। हाल ही में लंदन से अमेरिका को सोने की भारी खेप भेजी गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की लिक्विडिटी टाइट हो गई है। साथ ही भारत में ब्याज दरें बढ़ रही हैं और रुपया कमजोर हुआ है, जिससे सोने का आयात और महंगा हो गया है।
हालांकि वैश्विक बाजार में लीज दरें अब थोड़ा स्थिर हुई हैं, लेकिन इसका असर अभी भारत तक नहीं पहुंचा है। शेठ ने यह भी कहा कि छोटे और मध्यम स्तर के कारोबारी अब गोल्ड मेटल लोन लेने से पहले और ज्यादा सतर्क रहेंगे।
सोने की बढ़ती कीमतें और अस्थिर लीज रेट्स के चलते जूलर्स के पारंपरिक 5-8% के मुनाफे पर दबाव बढ़ गया है। इस मुश्किल हालात में जूलर्स अब अपनी वित्तीय रणनीतियों पर पुनर्विचार कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, जो जूलर्स गोल्ड मेटल लोन पर निर्भर हैं, वे अब हेजिंग, लीज शर्तों की पुनः बातचीत और स्टॉक का बेहतर प्रबंधन जैसे विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।

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