अमोनिया यूरिया कॉम्प्लेक्स
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने असम के नामरूप में एक नया यूरिया संयंत्र लगाने की मंजूरी दे दी है। इस परियोजना की कुल लागत ₹10,601.40 करोड़ होगी और इसे पूरा होने में चार साल (48 महीने) लगेंगे।
क्या है यह परियोजना ?
यह संयंत्र 12.7 लाख मीट्रिक टन यूरिया हर साल बनाएगा, जिससे किसानों को सस्ता और आसानी से उपलब्ध उर्वरक मिल सकेगा। यह संयंत्र पूर्वोत्तर, बिहार, पश्चिम बंगाल, पूर्वी उत्तर प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों में यूरिया की मांग को पूरा करने में मदद करेगा।
संयंत्र में कौन करेगा निवेश ?
इस परियोजना में अलग-अलग सरकारी कंपनियों की हिस्सेदारी होगी
✔ असम सरकार - 40%
✔ BVFCL (ब्रह्मपुत्र वैली फर्टिलाइजर कॉर्पोरेशन लिमिटेड) - 11%
✔ HURL (हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड) - 13%
✔ NFL (नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड) - 18%
✔ OIL (ऑयल इंडिया लिमिटेड) - 18%
क्या होंगे फायदे ?
1) किसानों को सस्ता और आसानी से यूरिया मिलेगा
2) स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे
3) पूर्वोत्तर भारत में औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा
4) नई तकनीक से बने संयंत्र से कम ऊर्जा खर्च होगी और पर्यावरण को कम नुकसान होगा
क्यों जरूरी है यह परियोजना ?
भारत में यूरिया की मांग बहुत ज्यादा है, और अभी भी कुछ मात्रा में इसका आयात करना पड़ता है। इस नए संयंत्र से देश में यूरिया उत्पादन बढ़ेगा और भारत को उर्वरक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी। यह फैसला किसानों, उद्योगों और अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा कदम है!
Editorial

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