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मनोज मुंतशिर का तीखा वार; बोले ‘नहीं मिट सकते औरंगजेब के गुनाह’
By EditorialPublished on
महाराष्ट्र में औरंगजेब की कब्र को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। मशहूर गीतकार मनोज मुंतशिर ने एक वीडियो जारी कर साफ शब्दों में कहा है कि उन्हें औरंगजेब की कब्र बर्दाश्त नहीं! अपने बयान में उन्होंने इसके पीछे की वजह भी बताई और इतिहास के पन्नों को पलटते हुए औरंगजेब के कथित काले कारनामों का ज़िक्र किया। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है और सियासी हलकों में भी चर्चाओं का दौर शुरू हो चुका है। तो क्या है पूरा मामला? देखिए हमारी ये खास रिपोर्ट।
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महाराष्ट्र में इन दिनों औरंगजेब की कब्र को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कई हिंदूवादी संगठनों ने छत्रपति संभाजीनगर में स्थित मुगल सम्राट औरंगजेब की कब्र हटाने की मांग उठाई है। इस मुद्दे पर अब बॉलीवुड के मशहूर लिरिसिस्ट और कवि मनोज मुंतशिर भी खुलकर सामने आए हैं। उन्होंने एक वीडियो जारी कर इतिहास पर अपनी राय रखते हुए औरंगजेब की क्रूरता को उजागर किया और उसकी कब्र बनाए रखने पर सवाल खड़े किए।
मुंतशिर का तीखा हमला – ‘संभाजी महाराज की धरती पर औरंगजेब की कब्र नहीं होनी चाहिए!’
मनोज मुंतशिर ने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने कहा कि संभाजी महाराज के राज्य में औरंगजेब की कब्र नहीं होनी चाहिए। उन्होंने औरंगजेब को एक क्रूर शासक करार देते हुए बताया कि उसने अपने पिता शाहजहाँ को कैद कर दिया और गद्दी के लिए अपने तीनों भाइयों की हत्या कर दी। इतना ही नहीं, उन्होंने कहा कि औरंगजेब ने हिंदुओं पर अत्याचार किए, काशी और मथुरा के मंदिरों को तोड़ा, हिंदू त्योहारों पर पाबंदी लगाई, और गौ हत्या को बढ़ावा दिया। इसके अलावा, उन्होंने संभाजी महाराज की हत्या का भी जिक्र किया, जिससे महाराष्ट्र के लोगों की भावनाएं इस विषय पर और भड़क सकती हैं।
भारत के मुस्लिमों से की भावनात्मक अपील :
मनोज मुंतशिर ने वीडियो में भारत के मुस्लिमों से अपील करते हुए कहा कि जो लोग औरंगजेब को पीर मानते हैं, वे फिर हमें भाई न कहें। उन्होंने साफ कहा कि ‘अब भाईचारा सिर्फ एक शर्त पर होगा – हिंदुस्तान का दुश्मन तुम्हारा भी दुश्मन होना चाहिए। अगर सच में ऐसा है, तो इसकी कब्र पर पहला वार कर के दिखाओ।’
सियासी हलकों में मचा बवाल, तेज हुई बहस :
मनोज मुंतशिर का यह बयान अब राजनीतिक गलियारों में गर्म बहस का मुद्दा बन गया है। जहां कुछ लोग उनकी बातों का समर्थन कर रहे हैं, वहीं कुछ इस बयान को सांप्रदायिक तनाव भड़काने वाला करार दे रहे हैं। अब देखना यह होगा कि महाराष्ट्र सरकार और प्रशासन इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाते हैं।

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