डोनाल्ड ट्रम्प
अमेरिका में संभावित आर्थिक मंदी को लेकर पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है। एक इंटरव्यू में ट्रंप ने मंदी की संभावना को पूरी तरह खारिज तो नहीं किया, लेकिन इस पर स्पष्ट भविष्यवाणी करने से बचते नजर आए। उन्होंने कहा कि अमेरिका एक बदलाव के दौर से गुजर रहा है और देश में संपत्ति व धन वापस लाने की प्रक्रिया जारी है, जिसमें कुछ समय लग सकता है। ट्रंप के इस बयान के बाद आर्थिक विश्लेषकों में बहस तेज हो गई है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आर्थिक मंदी की संभावना को खारिज करने से इनकार कर दिया है, जिससे अमेरिका की अर्थव्यवस्था को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है। रविवार को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि उनकी व्यापार टैरिफ नीतियां बड़े बदलाव ला रही हैं, लेकिन कुछ समय तक अस्थिरता बनी रह सकती है। बढ़ती महंगाई और बाजार में उथल-पुथल के बीच ट्रंप के इस बयान ने नई बहस को जन्म दे दिया है।
डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है, खासकर यूरोप में। उनके कड़े रुख के कारण नाटो (NATO) के भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जो देश अपने हिस्से की आर्थिक जिम्मेदारी पूरी नहीं करेंगे, अमेरिका उनकी रक्षा के लिए आगे नहीं आएगा। उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि अमेरिका अब नाटो देशों की सेनाओं पर अनावश्यक खर्च नहीं करेगा। ट्रंप का कहना है कि यदि अमेरिका किसी संकट में फंसता है, तो क्या अन्य नाटो देश, विशेष रूप से फ्रांस, उसकी मदद के लिए आगे आएंगे? उन्होंने इस पर संदेह जताया और कहा कि उन्हें कई सहयोगी देशों पर भरोसा नहीं है।
हालांकि, ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें नाटो संगठन से कोई विशेष समस्या नहीं है और वे इसे छोड़ने का इरादा नहीं रखते। लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि नाटो के सभी सदस्य देशों को अपने हिस्से का योगदान देना होगा, क्योंकि अब तक की व्यवस्था अमेरिका के लिए न्यायसंगत नहीं रही है। ट्रंप के इस बयान का असर नाटो की एकता और अमेरिका-यूरोप संबंधों पर पड़ सकता है। यह भी संभव है कि यूरोपीय देश अब अपनी सुरक्षा नीति को और स्वतंत्र बनाने पर विचार करें।
Editorial

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