ED कारवाई भूपेश बघेल
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल के घर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापा मारा। यह कारवाई कथित शराब घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में उनके बेटे चैतन्य बघेल के खिलाफ की गई। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने आवास पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी को लेकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया की जब ED की टीम उनके घर पहुंची, तब वे अखबार पढ़ रहे थे और चाय पी रहे थे। बघेल ने कहा की उन्होंने अधिकारियों का स्वागत किया और उनसे कहा की वह लंबे समय से इस कार्रवाई का इंतजार कर रहे थे।
भूपेश बघेल ने बताया की उनके घर में उनका पूरा परिवार—पत्नी, बेटा, बहू, बेटियां, पोते और पोतियां—साथ रहता है। उन्होंने कहा की उनका परिवार 140 एकड़ जमीन पर खेती करता है और डेयरी व्यवसाय भी चलाता है। ED को घर की तलाशी के दौरान लगभग 33 लाख रुपये नकद मिले, जो अलग-अलग परिवार के सदस्यों के पास थे। इसमें खेती से होने वाली आय, डेयरी व्यवसाय की कमाई और स्त्रीधन भी शामिल है। उन्होंने कहा की वे इस बारे में लिखित में जानकारी देने के लिए तैयार हैं।
बघेल ने इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाते हुए कहा की जब विधानसभा में सरकार से सवाल किए जाते हैं, तो उसके तुरंत बाद ED की कार्रवाई शुरू हो जाती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा की जब कवासी लखमा ने सवाल किए, तो उनके घर पर छापा पड़ा और उन्हें आठ दिनों में जेल भेज दिया गया। इसी तरह, उन्होंने विजय शर्मा से गरीबों के आवास को लेकर प्रश्न किया, और चार दिन बाद ED उनके घर पहुंच गई। बघेल का कहना है की अब विधानसभा में सवाल उठाना अपराध बन गया है।
क्या बोले भूपेश बघेल :
इस छापेमारी को लेकर भूपेश बघेल ने अपनी प्रतिक्रिया दी और सोशल मीडिया पर जानकारी साझा की। उन्होंने बताया की ED को उनके घर से तीन प्रमुख चीजें मिलीं -
१) मंतूराम और डॉ. पुनीत गुप्ता (पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के दामाद) के बीच करोड़ों रुपये के लेनदेन से जुड़ी बातचीत की पेनड्राइव।
२) डॉ. रमन सिंह के बेटे अभिषेक सिंह की शेल कंपनी के दस्तावेज।
३) पूरे संयुक्त परिवार की खेती, डेयरी, स्त्रीधन और नकद राशि मिलाकर लगभग 33 लाख रुपये, जिनका हिसाब दिया जाएगा।
भूपेश बघेल ने यह भी दावा किया की ED के अधिकारी कोई भी ECIR नंबर प्रस्तुत नहीं कर सके। कांग्रेस ने इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है, जबकी भाजपा ने इसे जांच एजेंसियों का स्वतंत्र निर्णय बताया है।
Editorial

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