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मुंबई। महाराष्ट्र सरकार मुंबई में गगनचुंबी इमारतों की अधिकतम ऊंचाई सीमा को 120 मीटर से बढ़ाकर 180 मीटर करने पर विचार कर रही है। इसके लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की तकनीकी समिति की मंजूरी अपेक्षित है।
यदि लागू होता है, तो यह परिवर्तन 50 से 60 मंजिल तक की इमारतें बनाने की अनुमति देगा, जिससे शहर के स्काईलाइन में महत्वपूर्ण बदलाव आएगा। रियल एस्टेट क्षेत्र ने इस कदम का स्वागत किया है। उद्योग के नेताओं का मानना है कि यह कदम निर्माण अनुमतियों को सरल बनाएगा, भूमि उपयोग को अनुकूलित करेगा और लंबवत विस्तार के माध्यम से मुंबई की स्थान संबंधी चुनौतियों का समाधान करेगा।
नरेडको महाराष्ट्र के अध्यक्ष प्रशांत शर्मा ने इसे एक महत्वपूर्ण बदलाव बताया, जो परियोजनाओं की समय-सीमा को त्वरित करेगा और व्यापार करने में सुगमता लाएगा। उन्होंने संरचनात्मक सुरक्षा और नियामक निगरानी पर ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उद्योग के विशेषज्ञों ने लंबवत विकास के पर्यावरणीय लाभों पर भी प्रकाश डाला। सिद्ध ग्रुप के निदेशक सम्यक जैन ने कहा कि लंबवत विकास शहरी विस्तार को कम करता है और ऊर्जा दक्षता में सुधार करता है।
हालांकि, विशेषज्ञों ने बुनियादी ढांचे में समानांतर सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया है। सीसीआई प्रोजेक्ट्स के निदेशक रोहन खटाऊ ने परिवहन, जल आपूर्ति और कचरा प्रबंधन में सुधार की मांग की।
यदि अनुमोदित होता है, तो यह नीति मुंबई में अति ऊंची इमारतों में रहने के एक नए युग की शुरुआत कर सकती है, लेकिन इसकी सफलता सावधानीपूर्वक योजना, बुनियादी ढांचे की तत्परता और स्थिरता मानदंडों के पालन पर निर्भर करेगी।
Editorial

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