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Sensex Nifty Stock Market : भारतीय स्टॉक मार्केट में भारी गिरावट आठ महीने के निचले स्तर पर
By EditorialPublished on
Sensex Nifty Stock Market : भारतीय स्टॉक मार्केट में भारी गिरावट आठ महीने के निचले स्तर परनई दिल्ली, 24 फरवरी 2025: भारतीय शेयर बाजार सोमवार को भारी गिरावट के साथ बंद हुआ। बीएसई सेंसेक्स (Sensex) और एनएसई निफ्टी (Nifty) दोनों में गिरावट देखने को मिली, जिस
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Sensex Nifty Stock Market : भारतीय स्टॉक मार्केट में भारी गिरावट आठ महीने के निचले स्तर पर
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नई दिल्ली, 24 फरवरी 2025: भारतीय शेयर बाजार सोमवार को भारी गिरावट के साथ बंद हुआ। बीएसई सेंसेक्स (Sensex) और एनएसई निफ्टी (Nifty) दोनों में गिरावट देखने को मिली, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। यह लगातार पाँचवां दिन था जब बाजार में गिरावट दर्ज की गई।
सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट
बीएसई सेंसेक्स 856.65 अंक (1.14%) गिरकर 74,454.41 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 242.55 अंक (1.06%) की गिरावट के साथ 22,553.35 पर बंद हुआ। यह आठ महीनों में बाजार का सबसे निचला स्तर है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट का मुख्य कारण विदेशी निवेशकों की बिकवाली, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और आईटी सेक्टर में कमजोरी है।
गिरावट के मुख्य कारण
1. वैश्विक आर्थिक चिंता
अमेरिकी अर्थव्यवस्था में संभावित मंदी की खबरों से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है। अमेरिका में उच्च ब्याज दरों और कमजोर आर्थिक विकास दर के कारण भारतीय आईटी कंपनियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
2. विदेशी निवेशकों की बिकवाली
फरवरी में अब तक विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने ₹30,588 करोड़ की बिकवाली की है, जबकि जनवरी में यह आँकड़ा ₹81,903 करोड़ था। विदेशी निवेशकों की यह बिकवाली बाजार में अस्थिरता पैदा कर रही है।
3. आईटी सेक्टर पर दबाव
आईटी सेक्टर में कमजोरी दिख रही है, विशेष रूप से विप्रो (Wipro) और एचसीएल टेक्नोलॉजीज (HCL Technologies) के शेयरों में 3% तक की गिरावट आई है। अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों में आईटी सेवाओं की मांग में कमी के कारण यह गिरावट देखी जा रही है।
4. अमेरिकी टैरिफ अनिश्चितता
अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर संभावित नए टैरिफ लगाने की आशंका से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है। इसके चलते ऑटोमोबाइल और फार्मा सेक्टर में भी दबाव देखने को मिला।
कौन से सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए?
आईटी सेक्टर: विप्रो, इंफोसिस, एचसीएल टेक में गिरावट
बैंकिंग सेक्टर: एचडीएफसी बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक में 2% तक की गिरावट
मेटल सेक्टर: टाटा स्टील और हिंडाल्को के शेयर भी दबाव में रहे
फार्मा सेक्टर: फार्मा स्टॉक्स में कुछ स्थिरता देखने को मिली, जबकि सन फार्मा और डॉ. रेड्डीज लैब में हल्की तेजी रही।
रियल एस्टेट सेक्टर: कमजोर मांग और बढ़ती ब्याज दरों के कारण रियल एस्टेट सेक्टर पर दबाव बना हुआ है।
निवेशकों के लिए आगे की रणनीति
विशेषज्ञों का कहना है कि इस गिरावट से घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसे समय में निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए और लॉन्ग टर्म निवेश पर ध्यान देना चाहिए। कुछ सलाहकारों के अनुसार:
गोल्ड और सिल्वर में निवेश: शेयर बाजार में अस्थिरता के समय सोने और चांदी में निवेश एक सुरक्षित विकल्प हो सकता है।
बॉन्ड और फिक्स्ड डिपॉजिट: सुरक्षित निवेश के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट और सरकारी बॉन्ड में निवेश किया जा सकता है।
ब्लू-चिप स्टॉक्स पर नजर: इस गिरावट के दौरान निवेशकों को ब्लू-चिप कंपनियों के स्टॉक्स पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि वे लंबे समय में अच्छा रिटर्न दे सकते हैं।
डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो: निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो को विविध बनाना चाहिए और केवल एक सेक्टर पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक्स: लंबी अवधि के लिए निवेश करने वालों के लिए मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक्स आकर्षक हो सकते हैं।
बाजार की आगे की दिशा
मंगलवार को बाजार में कुछ स्थिरता आने की उम्मीद है, लेकिन वैश्विक बाजारों से मिले संकेतों के आधार पर उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों को बाजार की चाल पर नज़र रखनी चाहिए और किसी भी बड़े निर्णय से पहले वित्तीय विशेषज्ञों से सलाह लेनी चाहिए।
इसके अलावा, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की अगली मौद्रिक नीति बैठक पर भी बाजार की नजरें टिकी हुई हैं। यदि आरबीआई ब्याज दरों में कोई बदलाव करता है, तो इसका असर बाजार की चाल पर पड़ेगा।
निष्कर्ष
भारतीय शेयर बाजार में आई इस गिरावट से निवेशकों को अल्पकालिक नुकसान जरूर हुआ है, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से यह बाजार में खरीदारी का मौका भी हो सकता है। सेंसेक्स और निफ्टी में उतार-चढ़ाव बना रहेगा, इसलिए निवेशकों को सावधानीपूर्वक निर्णय लेने की सलाह दी जाती है।
आने वाले दिनों में यदि विदेशी निवेशक बाजार में दोबारा प्रवेश करते हैं और घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) मजबूत निवेश करते हैं, तो बाजार में रिकवरी देखने को मिल सकती है। लेकिन वैश्विक कारक भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
निवेशकों को धैर्य बनाए रखना चाहिए और बाजार की हर हलचल पर नज़र रखनी चाहिए ताकि सही समय पर सही निर्णय लिया जा सके।

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