Veena Reddy USAID: भारत में चुनावी हस्तक्षेप का विवाद

VEENA REDDY
अमेरिकी विदेश सेवा की पूर्व अधिकारी और USAID (यूएस एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट) की पूर्व मिशन निदेशक, वीना रेड्डी, इन दिनों भारतीय राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत में वोटर टर्नआउट बढ़ाने के लिए $21 मिलियन की वित्तीय सहायता के पैकेज पर सवाल उठाया। इस कथन के बाद भारतीय राजनीति में विवाद गहरा गया और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसे विदेशी ताकतों का भारत के चुनावों में हस्तक्षेप मानते हुए इसे गंभीर आरोपों के रूप में प्रस्तुत किया। वहीं, कांग्रेस ने इसे "बेवकूफी" करार दिया।

वीना रेड्डी की भूमिका पर सवाल

वीना रेड्डी की भूमिका और USAID के भारत में बढ़ते हुए योगदान पर सवाल उठने लगे हैं। भाजपा के सांसद महेश जेठमलानी ने रेड्डी के बारे में ट्वीट करते हुए लिखा कि USAID ने भारत में "वोटर टर्नआउट" को बढ़ाने के लिए $21 मिलियन का पैकेज जारी किया, जो कि उन्होंने "चुनावों में सरकार बदलने के लिए मतदाताओं को भुगतान" करने का एक तरीका बताया। उनके मुताबिक, यह पैकेज USAID द्वारा भारतीय चुनावों में हस्तक्षेप की कोशिश हो सकता है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यह पैसा किसे दिया गया और इसे किस उद्देश्य के तहत उपयोग किया गया।
महेश जेठमलानी ने अपने ट्वीट में वीना रेड्डी के कार्यकाल पर भी सवाल उठाया, जिसमें उन्होंने उल्लेख किया कि रेड्डी को 2021 में भारत भेजा गया था और उनकी उपस्थिति के बाद, वोटर टर्नआउट बढ़ाने की योजना को लागू किया गया। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत में लोकसभा चुनाव 2024 के बाद वीना रेड्डी वापस अमेरिका लौट गईं, और इस समय तक उनकी योजना पूरी हो गई थी।

USAID के वित्तीय योगदान में वृद्धि

वीना रेड्डी के नेतृत्व में, USAID के भारतीय परियोजनाओं के लिए वित्तीय योगदान में तेजी से वृद्धि हुई। 2020 में भारत को $83.2 मिलियन की सहायता प्राप्त हुई थी, जो 2021 में बढ़कर $94.3 मिलियन हो गई। 2022 में यह राशि $228 मिलियन तक पहुंच गई, जो 2001 के बाद से सबसे अधिक थी। हालांकि, इसके बाद 2023 और 2024 में ये आंकड़े घटकर क्रमशः $175.7 मिलियन और $151.8 मिलियन रह गए।
इस वित्तीय योगदान में इतनी बड़ी वृद्धि ने सवाल उठाए हैं कि क्या USAID का उद्देश्य केवल विकास कार्यों तक सीमित था या इसका एक छिपा हुआ राजनीतिक उद्देश्य भी था, विशेष रूप से चुनावी प्रक्रियाओं में प्रभाव डालने के संदर्भ में।

वीना रेड्डी का करियर

वीना रेड्डी एक अनुभवी अमेरिकी राजनयिक और विकास विशेषज्ञ हैं। उन्होंने USAID के मिशन निदेशक के रूप में भारत और भूटान में सेवा की और यह भूमिका निभाने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी अधिकारी बनीं। रेड्डी ने पहले USAID कंबोडिया के मिशन निदेशक के रूप में भी कार्य किया था। इसके अलावा, उन्होंने हैती में उप मिशन निदेशक के रूप में भी कार्य किया, जहां उन्होंने भूकंप के बाद पुनर्निर्माण, चुनाव, आर्थिक विकास, खाद्य सुरक्षा, तूफान प्रतिक्रिया, और रणनीति निर्माण के कार्यों का नेतृत्व किया।
इसके अलावा, रेड्डी ने पाकिस्तान, मध्य एशिया, और मध्य अमेरिका में भी USAID मिशनों में सेवा दी थी। उन्होंने अपनी शिक्षा कोलंबिया विश्वविद्यालय से प्राप्त की, जहां से उन्होंने कानून में डिग्री (J.D.) हासिल की। इसके अलावा, उन्होंने शिकागो विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर (M.A.) और स्नातक (B.A.) की डिग्री प्राप्त की।

भारत में USAID की गतिविधियों पर आलोचना

भारत में USAID की गतिविधियाँ हमेशा विवादों से जुड़ी रही हैं। इसके द्वारा किए गए विकासात्मक कार्यों का अक्सर भारतीय राजनीति में उपयोग या उनके उद्देश्य पर सवाल उठते रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी और अन्य दक्षिणपंथी दलों का यह आरोप है कि USAID और अन्य विदेशी एजेंसियाँ भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने की कोशिश करती हैं, खासकर चुनावों के समय।
महेश जेठमलानी और अन्य भाजपा नेताओं ने यह सुझाव दिया कि USAID का उद्देश्य विकास के बजाय भारत में सत्ता परिवर्तन के लिए काम करना हो सकता है। उनका यह मानना है कि USAID द्वारा जारी की गई $21 मिलियन की राशि का एक छिपा हुआ उद्देश्य हो सकता है, जिसे केवल "वोटर टर्नआउट" बढ़ाने के नाम पर लागू किया गया था। इस संदर्भ में, उन्होंने भारत की जांच एजेंसियों से USAID के भारतीय खातों की जांच करने और पैसे के वितरण के विवरण को सार्वजनिक करने की मांग की है।

निष्कर्ष


वीना रेड्डी और USAID के भारत में बढ़ते प्रभाव को लेकर विवाद अब गहरा गया है। भाजपा और अन्य विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। जहां भाजपा इसे भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप मान रही है, वहीं कांग्रेस इसे एक निराधार आरोप मानती है। इस बीच, भारत सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि विदेशी सहायता का उपयोग केवल विकास कार्यों के लिए किया जाए और इसके माध्यम से चुनावों या अन्य राजनीतिक प्रक्रियाओं पर कोई प्रभाव न पड़े।
आने वाले समय में, यह देखना होगा कि इस विवाद का क्या हल निकलता है और क्या भारतीय जांच एजेंसियाँ USAID के वित्तीय योगदान और इसके उद्देश्य के बारे में कोई ठोस निष्कर्ष पर पहुँच पाती हैं।
Editorial

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