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मुंबई। शिवसेना में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुई ऐतिहासिक बगावत के बाद से शुरू हुआ उद्धव ठाकरे को झटका लगने का सिलसिला विधानसभा चुनाव 2024 के बाद भी जारी है। हाल ही में कोकण में उद्धव के विश्वसनीय सहयोगी रहे राजन सालवी पाला बदल कर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना में चले गए थे। तो वहीं मुंबई में जितेंद्र जानवले ने सोमवार को शिवसेना (यूबीटी) छोड़ने की घोषणा की थी।
नगरसेवक व अन्य छोटे-मोटे पदाधिकारियों का यूबीटी छोड़ना लगभग रोज की ही बात हो गई है। लेकिन इस भगदड़ को रोकने के लिए अब पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे भी मैदान में उतरने को तैयार हो गए हैं। मंगलवार को उन्होंने इसी सिलसिले में शिवसेना भवन में पार्टी के प्रमुख पदाधिकारियों की बैठक बुलाई थी।
इस बैठक में उन्होंने पार्टी को फिर से मजबूत बनाने तथा भगदड़ रोकने के लिए रोडमैप पर चर्चा की। पदाधिकारियों की शिकायतों को दूर करने के लिए उद्धव ने अब हर मंगलवार को बैठक करने का निर्णय लिया है।
पार्टी छोड़ने वालों ने लगाए गंभीर आरोप
उद्धव ठाकरे तक पदाधिकारियों की पहुंच संभव नहीं होना शिवसेना (यूबीटी) में भगदड़ का सबसे बड़ा कारण बना है। पार्टी छोड़ने वाले एकनाथ शिंदे सहित सभी नेता एक ही आरोप लगाते रहे हैं कि उद्धव उनसे मिलते नहीं। संजय राउत, सुभास देसाई, अनिल देसाई, विनायक राउत, अनिल परब, मिलिंद नार्वेकर आदि करीबी नेता पार्टी के बारे में उद्धव को भ्रमित करके पार्टी को डुबो रहे हैं।
ऐसे में अब डैमेज कंट्रोल के लिए उद्धव ने मंथन शुरू कर दिया है। शिवसेना भवन में ठाकरे गुट की बैठक महत्वपूर्ण नेताओं की मौजूदगी में उद्धव ने कोकण सहित राज्य के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा करने तथा नए लोगों को पार्टी में जोड़कर संगठन को फिर से खड़ा करने का प्रण लिया।
इतना ही नहीं उन्होंने अब से हर मंगलवार को बैठक आयोजित करने का भी निर्णय लिया है। ऐसा माना जा रहा है कि आगामी मनपा चुनाव की पृष्ठभूमि में उद्धव ठाकरे अब संभल कर कदम आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं।
Editorial

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