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मुंबई। प्रोफेसर साध्वी मंगलप्रज्ञा के नेतृत्व में तेरापंथ समाज का एक प्रतिनिधिमंडल महाराष्ट्र राजभवन पहुंचा। यहाँ राज्यपाल सी. पी. राधाकृष्णन् की उपस्थिति में अणुव्रत संगोष्ठी आयोजित हुई। राज्यपाल ने साध्वी मंगलप्रभा के सम्मुख मस्तक झुकाकर अभिवादन किया। कार्यक्रम के आरम्भ में अणुविभा का परिचय महामंत्री मनोज सिंघवी ने दिया। स्वागत मुम्बई सभाध्यक्ष माणक धींग ने किया। महासभा के पूर्व अध्यक्ष किशनलाल डागलिया, अणुविभा उपाध्यक्ष विनोद कोठारी, आचार्य महाप्रज्ञ विद्यानिधि फाउण्डेशन अध्यक्ष कुन्दनमल धाकड, कार्याध्यक्ष गणपतलाल डागलिया, नीतेश धाकड आदि ने राज्यपाल का सम्मान किया।
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संचालन अणुविभा राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य राजकुमार चपलोत ने किया। साध्वी राजुलप्रभा ने साध्वी मंगलप्रज्ञा का परिचय प्रस्तुत किया। साध्वी मंगलप्रज्ञा ने गुरुदेव तुलसी द्वारा प्रवर्तित अणुव्रत आन्दोलन के विभिन्न आयामों की विस्तार से जानकारी दी। साध्वी चैतन्यप्रभा ने एलिवेट कार्यक्रम एवं साध्वी शौर्यप्रभा ने डिजिटल डिटॉक्स की जानकारी दी। राज्यपाल ने कहा कि सामान्यतः लोग सोचते हैं कि जैन धर्म उत्तर भारत में ही है, किन्तु ऐसा नहीं है। जैन धर्म दक्षिण में बहुत था। दो तिहाई तमिल पूर्व में जैन थे। साध्वी मंगलप्रज्ञा ने आचार्य महाश्रमण के अहमदाबाद चातुर्मास की जानकारी दी। साध्वी सुदर्शन प्रभा एवं साध्वी अतुलयशा ने सामयिक गीत का संगान किया।
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