Avimuktanand Sarswati
प्रयागराज: MahaKumbh 2025 की तैयारियों के बीच VIP संस्कृति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। संत समाज से जुड़े प्रमुख संतों और श्रद्धालुओं के विरोध के बाद अब जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने भी इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि महाकुंभ आस्था का पर्व है, न कि VIP संस्कृति का प्रदर्शन करने का मंच!

🔹 शंकराचार्य ने क्या कहा?

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने महाकुंभ में VIP कल्चर को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि?

"महाकुंभ सनातन धर्म और आध्यात्मिकता का प्रतीक है। यहां किसी के लिए विशेष दर्जा नहीं होना चाहिए। लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि यह आयोजन धर्म से ज्यादा सत्ता और पैसे वालों के प्रदर्शन का मंच बन गया है। आम श्रद्धालु और VIP को दो वर्गो में बांटा जा रहा है। जहाँ सभी हिंदु इक� ्� ा आए हो वहाँ ऐसा कृत्य क्या संविधानिक है। यह सरासर अन्याय है!"

उन्होंने प्रशासन पर सवाल उ� ाते हुए कहा कि धार्मिक आयोजनों में VIP संस्कृति को बढ़ावा देना गलत परंपरा है। इससे कुंभ की मूल भावना प्रभावित हो रही है।

🔹 श्रद्धालुओं के लिए मुश्किलें बढ़ीं!

शंकराचार्य ने कहा कि VIP कल्चर की वजह से आम श्रद्धालुओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

  • बड़ी-बड़ी गाड़ियों और लाल बत्ती वाली गाड़ियों के कारण ट्रैफिक जाम की स्थिति बन रही है।
  • आम श्रद्धालु घंटों तक प्रवेश द्वारों पर खड़े रह जाते हैं, लेकिन VIP लोगों को खास सुविधाएं दी जा रही हैं।
  • स्नान घाटों तक VIP लोगों की एंट्री अलग से हो रही है, जिससे श्रद्धालुओं को स्नान करने में क� िनाई हो रही है।

शंकराचार्य ने कहा कि धर्म का स्थान सबसे ऊपर है, किसी पद या प्रतिष्� ा का नहीं! प्रशासन को चाहिए कि वह इस VIP संस्कृति को खत्म करे और सभी के लिए समान व्यवस्था लागू करे।

🔹 VIP संस्कृति को लेकर बढ़ रहा विरोध!

महाकुंभ में VIP कल्चर को लेकर साधु-संतों और श्रद्धालुओं का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है। हाल ही में कई अखाड़ों के संतों ने भी इस संस्कृति के खिलाफ विरोध जताया था। उनका कहना था कि अगर यही स्थिति रही तो वे आंदोलन करने पर मजबूर हो जाएंगे।

🔹 प्रशासन का क्या कहना है?

महाकुंभ प्रशासन ने इस पूरे मामले पर सफाई देते हुए कहा कि?

  • "VIP लोगों के लिए अलग से व्यवस्था करना हमारी मजबूरी है, क्योंकि सुरक्षा कारणों से उन्हें अलग से स्नान और दर्शन की सुविधा दी जा रही है।"
  • "हम आम श्रद्धालुओं के लिए भी सुविधाओं में सुधार कर रहे हैं ताकि किसी को असुविधा न हो।"
Editorial

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