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मुंबई । महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) में फिर से टूट का खतरा मंडराने लगा है। राज्य के उद्योग मंत्री एवं शिवसेना शिंदे गुट के वरिष्ठ नेता उदय सामंत ने स्पष्ट रूप से कहा कि जल्द ही शिवसेना (यूबीटी) के 4 विधायक एवं 3 सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होंगे।
कुछ ही दिनों पहले शिवसेना के पूर्व सांसद राहुल शेवाले ने दावा किया था कि शिवसेना (यूबीटी) एवं कांग्रेस के कई विधायक उनके संपर्क में हैं। वे जल्द ही एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होंगे। दावोस से लौटते ही उदय सामंत ने भी दावा किया कि शिवसेना (यूबीटी) के 4 विधायक एवं 3 सांसद और कांग्रेस के 5 विधायक उनके संपर्क में हैं।
पिछले कुछ दिनों से शिवसेना (यूबीटी) की ओर से एकनाथ शिंदे की शिवसेना में फूट पड़ने का दावा किया जा रहा है। उसकी ओर से कहा जा रहा था कि शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता एवं राज्य के उद्योग मंत्री उदय सामंत कई विधायकों के साथ अपना अलग गुट बनाकर एकनाथ शिंदे से अलग होना चाहते हैं।
उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) एवं कांग्रेस की ओर से बार-बार कहा जा रहा था कि भाजपा के लिए अब एकनाथ शिंदे की उपयोगिता समाप्त हो गई है। इसलिए, वह उदय सामंत को एक और शिवसेना बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। बता दें कि जब ये बयान आ रहे थे, तब उदय सामंत मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ दावोस के दौरे पर थे। जबकि गुरूवार को दावोस से लौटते ही सामंत ने शिवसेना (यूबीटी) में ही फूट की घोषणा कर दी है।
गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनाव में शिवसेना महाविकास आघाड़ी में 20 विधायकों के साथ सबसे बड़ा दल बनकर उभरी थी। विपक्षी दलों में इसके बाद कांग्रेस 16 विधायकों के साथ दूसरे एवं राकांपा ( शरदचंद्र पवार ) 10 विधायकों के साथ तीसरे स्थान पर है। इतनी कम सीटें पाने के बाद इन तीनों दलों में टूट का खतरा मंडरा रहा है। शरद पवार के 10 विधायकों को तो विधानसभा के चुनाव ही दिनों बाद कुछ अजीत पवार गुट की तरफ से राकांपा में शामिल होने के परोक्ष प्रस्ताव मिलने लगे थे।
यदि इन दलों के दो तिहाई विधायक एक साथ आकर किसी दल में शामिल होते हैं तो उन पर दल-बदल के तहत कार्रवाई का खतरा भी नहीं रहेगा। लेकिन अपने दल पर टूट के खतरे के बावजूद उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने उदय सामंत के दावे की खिल्ली उड़ाते हुए कहा है कि अब तो यही कहना शेष रह गया है कि उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे एवं स्वयं मैंने उनकी पार्टी में शामिल होने की अर्जी लगाई है।
Editorial

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