Udaipur
उदयपुर| जिले के भीण्डर थाना क्षेत्र में मंदबुद्धि विवाहिता का गला घोंट कर हत्या कर धारदार हथियार से पैर काट कर चांदी के कड़े लूटने वाले दो आरोपियां को आजीवन कारावास और 25-25 हजार रूपये जुर्माना जबकि लूटे हुए कड़ों को खुर्द-बुर्द करने वाले तीसरे आरोपी को तीन वर्ष का कारावास व पांच हजार रूपये जुर्माने की सजा सुनाई।
प्रकरण के अनुसार भींडर थाना क्षेत्र में 11 जुलाई 2015 को उदा पुत्र माना रावत ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसकी मंदबुद्धि पत्नी मीरां बाई 10 जुलाई को रात्रि करीब 8 से 9 बजे शौच करने के लिए घर से निकली थी, वापस घर नहीं लौटी। रात को ढूंढा लेकिन पता नहीं लगा। 11 जुलाई को सुबह खेत से नानी काली मगरी पर शोच करने गया तो खेत की दिवार के पास साड़ी में उसके दोनों पांव कटे होकर लिपटे पड़े थे और थोड़ी ही दूर पत्नी का शव पड़ा था। पास में ही भंवरलाल कालबेलिया के मकान के पास बबूल के पेड़ के वहां उसकी चप्पलें पड़ी थी और खड्डे में लोहे की दांतली, संडासी व छुरी खून से सने होकर पड़े थे। पत्नी की हत्या कर उसके पांव काट कर पांव में पहने आधा किलो चांदी की कड़ियां लूट कर ले गए। इस मामले LAW में भींडर थाना पुलिस ने जांच-पड़ताल करते हुए चौहानों का खेड़ा भोंडर निवासी शान्तिलाल पुत्र भमरू उर्फ भंवरलाल कालबेलिया, चौहानों का खेड़ा हाल घोला मगरा भींडर निवासी बंशीलाल पुत्र भग्गा कालबेलिया एवं इनके साथी ऊँचा सदर निम्बाहेड़ा निवासी शमशेर पुत्र मुनीर खान को गिरफ्तार किया। तीनों आरोपियों के खिलाफ जांच पूर्ण कर कोर्ट में आरोप पत्र पेश किया।
मामले की सुनवाई के दौरान विशिष्ट लोक अभियोजक गजेंद्र सिंह सांखला ने 26 गवाह और 72 साक्ष्य एवं 17 आर्टिकल प्रदर्शित किए। बरामद हथियारों पर जो खून लगा था वह एफएसएल जांच रिपोर्ट में मृतका का ही पाया गया। चिकित्सकीय साक्ष्य एवं बंशीलाल की निशानदेही से जो कुल्हाड़ी बरामद की गई उस पर भी जो खून पाया गया वह भी मृतका का ही था। हत्या कर जो कड़ियां लूटी गई उन पर जो खून पाया गया वह भी जांच में मृतका का ही पाया गया। आरोपियों के पहने हुए कपड़े बरामद किए उन पर भी मृतका का खून लगा हुआ था। आरोपी शान्तिलाल व बंशीलाल ने मंदबुद्धि विवाहिता का गला घोंट कर हत्या की और बाद में कुल्हाड़ी व छुरी से पांव काट कर चांदी के कड़े लूट लिए। उनके साथी शमशेर के सहयोग से लूटे हुए कड़ों को खुर्द-बुर्द किया गया। तीनों आरोपियों पर अपराध सिद्ध करने में अभियोजन पक्ष सफल रहा। विशिष्ट लोक अभियोजक ने अपने तर्क में कहा कि अभियुक्तों के प्रति नरमी का रूख अपनाया जाता है तो समाज में अव्यवस्था फैल जाएगी और कानून का डर नहीं रहेगा और अधिक से अधिक सजा देने का आग्रह किया।
दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद विशिष्ट न्यायाधीश अजा अजजा की पीठासीन अधिकारी ज्योति के. सोनी ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अपने फैसले लिखा कि ऐसे प्रकरणों में नरमी का रूख अपनाया जाता है तो न्याय के उद्धेश्यों की पूर्ति नहीं होगी। अभियुक्तों को नियमानुसार सजा से ही न्याय के उद्देश्यों की पूर्ति होगी।
अभियुक्त शान्तिलाल कालबेलिया व बंशीलाल कालबेलिया को भादर्स की धारा 302/120-बी में आजीवन कारावास व 10-10 हजार रूपये जुर्माना, 394/120-बी में उम्र कैद व 10-10 हजार रूपये जुर्माना और शान्तिलाल, बंशीलाल व शमशेर खान को 201/120-बी में तीन-तीन वर्ष का कारावास व पांच-पांच हजार रूपये जुर्माने की सजा सुनाई। शमशेर खान ने दोनों अभियुक्तों द्वारा पैर काट कर कर जो चांदी के कड़े लूटे गए उन्हें रणजीत की दुकान पर गिरवी रखवा कर खुर्द-बुर्द करने का आरोप था।
Editorial

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