mumbai
मुंबई। दक्षिण मुंबई में आयोजित परिवार प्रशिक्षण कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए प्रो. साध्वी मंगलप्रज्ञा ने कहा कि जो व्यक्ति समूह में जन्म लेता है और समूह में जीता है, वह सौभाग्यशाली होता है। समूह का अपना अनुशासन होता है, नियम होते हैं, मर्यादाएं होती हैं। पारिवारिक जीवन में कुछ महत्त्वपूर्ण चिन्तनीय सूत्र होते हैं। समूह में रहने वाला हर सदस्य यह चिन्तन करे कि मेरे व्यवहार से दूसरे को समस्या न हो। सबके चिन्तन, विचार अलग- अलग होते हैं, आवश्यक है सद्‌विचार, सद्‌चिन्तन का आदर करें। परिवार संस्कारों की प्रयोगशाला है। संस्कार सिंचन के अभाव में नस्लें खराब हो जाती है। साध्वी डॉ चैतन्यप्रभा ने कहा कि परिवार में शांत सहवास के लिए सम्यक दृष्टिकोण की अपेक्षा है। साध्वी सुदर्शनप्रभा, साध्वी अतुलयशा एवं साध्वी चैतन्यप्रभा ने परिवार सुहाना उपवन है गीत का संगान किया। संयोजन साध्वी सुदर्शनप्रभा ने किया। साध्वी डॉ राजुलप्रभा ने साध्वीश्री के सूत्रों को अपना कर हम जीवन की राहों पर चलेंगे तो सफलता अवश्य मिलेंगी। आचार्य महाप्रज्ञ विद्यानिधि फाउंडेशन, तेरापंथी सभा, युवक परिषद्, महिला मंडल की उपस्थिति रही।
Next Story