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मुंबई। पिछले कुछ सालों में ज्वेलर्स ब्लॉक बीमा के तहत फिडेलिटी दावों में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है। पहले कोविड-19 महामारी के प्रभाव और हाल के समय में निरंतर बढ़ते धोखाधड़ी के मामलों के चलते बीमा कंपनियों को इन दावों के भुगतान में भारी नुकसान झेलना पड़ा है। इसके चलते अधिकांश बीमा कंपनियों ने अपने प्रीमियम दोगुने तक बढ़ा दिए हैं।
दावों में 300% की वृद्धि :
पिछले दो वर्षों में, ज्वेलर्स ब्लॉक बीमा के तहत फिडेलिटी दावों का अनुपात 300% तक पहुंच गया है। इसका अर्थ यह है कि बीमा कंपनियों को हर 100 रुपये के प्रीमियम के बदले 300 रुपये दावों में चुकाने पड़े। यह स्थिति बीमा कंपनियों के लिए अस्थिर साबित हो रही है, जिसके चलते प्रीमियम दरों में दोगुनी वृद्धि की गई है।
घाटे के मुख्य कारण:
ज्वेलर्स ब्लॉक बीमा के अंतर्गत सबसे अधिक दावे का सबसे बड़ा कारण तो यह है कि सोना कारीगरों की धोखाधडी के चलते ज्वेलरी कारोबारियों ने काफी नुकसान झेला है। कारोबारियों को उस समय नुकसान झेलना पड़ता है जब सोना कारीगर जिन्हें जूलरी तैयार करने के लिए सोना सौंपा गया था, वे स्टॉक लौटाने में असफल रहते हैं या फिर सोना लेकर फरार हो जाते हैं। हालांकि ज्वेलर्स के इस नुकसान की भरपाई काफी हद तक फिडेलिटी दावे के तहत हो जाती है और अंतत: इसका बोझ बीमा कंपनियों पर पड़ता है। हाल के दिनों में चूंकि सोना कारीगरों और जूलरी कारोबारियों द्वारा सोने के गबन, ठगी और धोखाधड़ी के मामलों में अप्रत्याशित वृद्धि देखने को मिली है, जिससे बीमा कंपनियों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। जूलरी कारोबार में सक्रिय अन्य कर्मचारियों की वफादारी पर सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारियों द्वारा चोरी और धोखाधड़ी के मामले में भी लगातार बढ़ रहे हैं। इन सारी वजहों से बीमा दावों में भी खासा इजाफा हुआ है।
बीमा प्रीमियम में वृद्धि: अनिवार्यता या विकल्प?
दावों में हुई इस तेज वृद्धि के कारण बीमा कंपनियों को न केवल अपनी नीतियों का पुनर्मूल्यांकन करना पड़ा, बल्कि प्रीमियम दरों में वृद्धि करना भी आवश्यक हो गया। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार की स्थितियों से निपटने के लिए यह कदम बीमा कंपनियों की वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए जरूरी था। यह प्रवृत्ति न केवल बीमा उद्योग के लिए चिंताजनक है, बल्कि ज्वेलर्स के लिए भी एक नई चुनौती प्रस्तुत करती है, जिन्हें बढ़े हुए प्रीमियम के साथ अपने व्यवसाय को सुरक्षित रखने की योजना बनानी होगी।
Editorial

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