torres mumbai
मुंबई। आर्थिक अपराध शाखा(Economic Offenses Wing) (ईओडब्ल्यू) द्वारा जांच किए जा रहे टॉरेस इन्वेस्टमेंट घोटाले में खुलासा हुआ है कि हजारों निवेशकों को बेचे गए हीरे और पत्थर नकली थे। 500-1000 रुपये के पत्थरों को महंगे रत्न बताकर ऊंचे दामों पर बेचा गया।
पीड़ितों को gra-gems.com नामक वेबसाइट पर नकली प्रमाणपत्र दिखाकर लुभाया गया, जिसे यूक्रेनी स्कैमर्स ने बनाया था। इन प्रमाणपत्रों में एक यूनिक कोड होता था, जिसे स्मार्ट कार्ड के जरिए सत्यापित किया जा सकता था। हालांकि, ये प्रमाणपत्र प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं जैसे जीआईए या आईजीआई द्वारा जारी नहीं किए गए थे।
सोमवार को विशेष एमपीआईडीए कोर्ट में पुलिस ने बताया कि इस अपराध को अंजाम देने के लिए लगभग 25 करोड़ रुपये शो-रूम किराए, फर्नीचर, हीरे और गहने खरीदने, और शुरुआती रिटर्न देने में खर्च किए गए।
प्लैटिनम हर्न प्राइवेट लिमिटेड, जो टॉरेस ज्वेलरी चेन चलाती है, के निदेशकों और वरिष्ठ अधिकारियों पर मुंबई, नवी मुंबई, ठाणे और मीरा-भायंदर के 18 हजार से अधिक लोगों को करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी से ठगने का आरोप है।
अब तक 2 हजार से अधिक शिकायतें दर्ज की गई हैं, और धोखाधड़ी की राशि 38 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। पुलिस ने बताया कि मुंबई कार्यालय से 16.29 लाख रुपये, आरोपी तानिया और वलेन्टिना कुमार से 77.15 लाख रुपये, और टॉरेस कंपनी के शो-रूम और कार्यालयों से 5.98 करोड़ रुपये बरामद किए गए हैं।
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान यह शक है कि ठगी की रकम अवैध रूप से विदेश भेजी गई है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को नुकसान हुआ है। इस मामले में आगे जांच की आवश्यकता है।
अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें तानिया उर्फ ताज़ागुल खातासोवा और ओसीआई कार्डधारी रूसी नागरिक वलेन्टिना के शामिल हैं। कोर्ट ने उनकी हिरासत शनिवार तक बढ़ा दी है। अब तक 21 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है, जिसमें नकद, सोने के गहने और 11 कारें शामिल हैं।
Editorial

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