Illuminated nameplates
मुंबई। दुकानों के नामफलक (nameplates of shops) में भाषा की अनिवार्यता के मुद्दे के बाद अब नामफलक की रोशनी (Illuminated nameplates) पर दुकानदारों और मुंबई महानगरपालिका (Municipal Corporation of Mumbai) के बीच तनातनी की स्थिति नजर आ रही है। जो नामफलक लाइट्स के जरिये रोशन नजर आते हैं, मुंबई मनपा उन्हें नियामानुसार विज्ञापन मानती है। ऐसे ग्लोसाईन बोर्ड्स वाले दुकानों को मनपा की ओर से कानूनी नोटीस भेजे जा रहे है। जाहिर है, दुकानदारों को इस तरह के ग्लोसाइन बोर्ड्स के लिये मनपा से अनुमति भी लेनी होगी और अतिरिक्त शुल्क भी अदा करना होगा। दुकानदार इसी बात को लेकर कड़ा एतराज जता रहे हैं।
फेडरेशन फॉर रिटेल ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन (एफआरटीडब्ल्यूए) ने मनपा के इस कदम का विरोध किया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष विरने शाह ने 21 सितंबर को मनपा को पत्र लिखकर ऐसे ग्लोसाइन बोर्ड्स को विज्ञापन माने जाने पर आपत्ति जताते हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका अधिनियम की धारा 328 ए को निरस्त करने की मांग की है। इस कानूनी प्रावधान के अनुसार, रोशनी से जगमग नामफलक को विज्ञापन के तौर पर माना जाता है। इसके लिये मनपा आयुक्त की लिखित अनुमति आवश्यक है। आवश्यक अनुमति के बगैर कोई भी इस तरह के ग्लोसाइन बोर्ड्स का किसी भी जमीन, बिल्डिंग, दीवार, होर्डिंग अथवा स्ट्रक्चर पर इस्तेमाल नहीं कर सकता। अनुमति के बिना अगर इस तरह का कोई ग्लोसाइन बोर्ड्स लगाया जाता है तो नियम-कानून के हिसाब से यह अवैध है।
मनपा इसी प्रावधान के तहत दुकानदारों को कानूनी नोटीस भेज रही है। व्यापारियों की संस्था एफआरटीडब्ल्यूए के मुताबिक, यह कुछ और नहीं, केवल मनपा द्वारा व्यापारियों की प्रताड़ना है। मनपा व्यापारियों के साथ अपराधियों की तरह बर्ताव कर रही है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष विरेन शाह ने पत्र में बीएमसी के इस रवैये पर एतराज जताते हुए कहा है कि यह कितना अतार्किक है कि एक नामफलक को अगर आप नियोन लाइट की रोशनी से सजाते हैं तो यह अचानक से एक विज्ञापन बन जाता है। धारा 328-ए के तहत आपराधिक नोटीसेस को अब तक सुप्रीम कोर्ट्स समेत कई अदालतों ने स्थगनादेश दे रखा है। इस धारा के तहत दर्ज अपराध गैर-जमानती माना जाता है। लिहाजा मनपा के हाथ में यह व्यापारियों की गर्दन दबोचने के लिये एक कारगर हथियार के तौर पर इस्तेमाल होता है। जबकि अदालतों के फैसले इस कानूनी धारा के पक्ष में नहीं रहे हैं।
शाह के मुताबिक, एक तरह तो सरकार मुंबई को सिंगापुर जैसे शहरों की तर्ज पर आधुनिक बनाने की बात करती है और यहां की नाइटलाइफ को और अधिक रंगीन और आकर्षक बनाना चाहती है। मनपा और सरकार इसके जरिये दुनियाभर के पर्यटकों और खरीदारों को आकर्षित करने के मंसूबे रखती है, जबकि दूसरी तरफ, अगर कारोबारी अपने दुकान या संस्थान पर ग्लोसाइन बोर्ड्स लगाते हैं तो उन्हें गलत कानूनी नोटीस भेजे जाते हैं। कोई भी व्यक्ति इस तरह के किसी भी कानूनी प्रावधान को कैसे सही मान सकता है। यदि मनपा ने ये नोटीस वापस नहीं लिए और दुकानदारों को इसी तरह से तंग करना जारी रखा तो कारोबारी समुदाय वर्तमान सरकार का विरोध करेगा। यह सरकार व्यापारियों की विरोधी है और जरूरत पड़ी तो दुकानदारों की ओर से विरोध स्वरूप रिटेल बंद का आयोजन किया जायेगा।
दादर व्यापारी संघ के अध्यक्ष सुनील शाह के मुताबिक, उनके इलाके में भी मनपा की यह मनमानी जारी है। एक होटल व्यवसायी को इसी कानूनी धारा के तहत मनपा ने नोटीस जारी किया है। केवल अपने होटल के नामफलक के तौर पर ग्लो साइन बोर्ड्स का इस्तेमाल करने के कारण यह नोटीस जारी किया गया है। हालांकि मनपा के नोटीस का कानूनी जवाब दिया गया है।
उधर बीएमसी अधिकारियों की दलील है कि ये कानूनी नोटीस केवल कानूनी प्रावधानों के तहत नियमानुसार जारी किये जा रहे हैं। दुकानदार चाहें तो मनपा से अनुमति लेकर ऐसे नामफलक लगा सकते हैं। मनपा जो कानूनी नोटिस भेज रही है, उसमें दुकानदारों से अनुमति के दस्तावेज ही पेश करने के लिये कहा जा रहा है। इस तरह के ग्लोसाइन बोर्ड्स के लिये दुकानदारों से मनपा नियमानुसार प्रति वर्ग मीटर की दर से शुल्क वसूलती है। यह नियम है। मनपा अधिकारियों के मुताबिक, इसी तरह की व्यवस्था के तहत शुल्क आदि के तौर पर धनप्राप्ति ही मनपा की आय का एक प्रमुख साधन भी है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष विरेन शाह के मुताबिक, दुकानदारों का एतराज इसी बात को लेकर है कि रोशन नामफलक को विज्ञापन क्यों कर माना जाना चाहिए? उसे विज्ञापन मानकर ही मनपा शुल्क वसूली करती है जबकि यह महज दुकान या संस्थान का नामफलक है जिसे रोशन किया गया है। लिहाजा ऐसे रोशन नामफलक को विज्ञापन मानना ही बुनियादी तौर पर गलत है और संस्था इसी मुद्दे पर मनपा के विरोध में है।
Editorial

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