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सेवा के साथ साधना ही हो सेवा साधक श्रेणी की पहचान : आचार्यश्री महाश्रमण
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आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) के सानिध्य में तेरापंथ महिला मंडल (Terapanth Mahila Mandal) के राष्ट्रीय अधिवेशन ‘संरक्षणम्’ का आयोजन हुआ। आयोजन में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत मुख्य अतिथि थे।

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सूरत। आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) के सानिध्य में तेरापंथ महिला मंडल (Terapanth Mahila Mandal) के राष्ट्रीय अधिवेशन ‘संरक्षणम्’ का आयोजन हुआ। आयोजन में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत मुख्य अतिथि थे। उन्होंने आचार्यश्री को वंदन कर महिला शक्ति को संबोधित करते हुए सशक्त महिला शक्ति के जागरण व विकास की बात कही। आचार्य महाश्रमण ने भी महिला संभागियों को पावन पाथेय प्रदान किया। साध्वीप्रमुखा ने भी इस अवसर पर उपस्थित महिलाओं को अभिप्रेरणा प्रदान की।
आचार्य महाश्रमण ने कहा कि दो शब्द हैं अनुश्रोत और प्रतिश्रोत। संसार के प्रवाह में बहना, इन्द्रिय विषयों में आसक्त रहना अनुश्रोत तथा त्याग, संयम और साधना के पथ पर चलना प्रतिश्रोतगामिता होती है। जिस दिशा में पानी का प्रवाह हो उस दिशा में तिनका भी बहता है, पानी की धारा के विपरीत चलना, आगे बढ़ना प्रतिश्रोतगामिता होती है, जीवित होने की निशानी होती है। सामान्य आदमी अनुश्रोत में चलने वाला होता है। इन्द्रियों विषयों में आसक्त रहने वाला हो सकता है। साधु, साधक श्रोत के प्रतिकूल चलने वाला होता है। साध्वीवर्या साध्वी सम्बुद्धयशा ने भी उद्बोधित किया। महिला मंडल के अधिवेशन के दूसरे दिन राष्ट्रीय अध्यक्ष सरिता डागा ने भावाभिव्यक्ति दी। अभिनंदन पत्र का वाचन पुष्पा बैद ने किया।

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