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सचिव से मिलकर फर्जी पट्टा बनाया
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जिले के गोगुन्दा थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति ने तीन भाईयों के खिलाफ उसका मकान हड़पने के लिए सरपंच और सचिव से मिलकर फर्जी पट्टा (fake lease) बनाने का मामला दर्ज करवाया है।

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उदयपुर. नगर संवाददाता | जिले के गोगुन्दा थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति ने तीन भाईयों के खिलाफ उसका मकान हड़पने के लिए सरपंच और सचिव से मिलकर फर्जी पट्टा (fake lease) बनाने का मामला दर्ज करवाया है।
पुलिस (Police) के अनुसार हिम्मतमल पुत्र कन्हैया लाल जैन निवासी मचींद खमनोर राजसमन्द हाल बडौदा गुजरात ने मामला दर्ज करवाया कि उसका मचींद तुला गाव से 7 किलोमीटर दूर है। जहां पर तुला गाव में उसके दादाजी का एक मकान व दुकान आई है। उसी दुकान पर उसके पिता व्यवसाय करते थे। पिछले करीब 30 वर्षों से सभी पाचो भाई महाराष्ट्र (Maharashtra) व गुजरात (Gujrat) व्यवसाय के लिए चले गये व कभी कभार आकर मकान व दुकान की सार संभाल करते है। यह मकान व दुकान प्रार्थी हिम्मतलाल के बंटवारे में आने से वह भी देखरेख करता है।
मौके पर उसका ही कब्जा है। आज से करीब 20 दिन पूर्व प्रार्थी हिम्मतलाल ने तुला निवासी प्रेम सिंह को उसके मकान की मरम्मत के लिए कहा व प्रेम सिंह उसके मकान पर मरम्मत का काम चालू किया। जिस पर छगन सिंह व उसके भाई उदयसिंह व किक सिंह पुत्र किशन सिंह ने आकर मरम्मत का कार्य रूकवा दिया। कोर्ट में स्टे का प्रार्थना पत्र छगन सिंह बनाम प्रेम सिंह के खिलाफ पेश किया, जिसमें छगन सिंह ने कठार पंचायत से एक बापी पट्टा जारी करना बताया, जिसमें छगन सिंह ने प्रार्थी के मकान का सामलाती पोल का पट्टा ग्राम पंचायत सरपंच तुलसीराम व ग्राम सेवक से मिलीभगत कर छगन सिंह ने अपने नाम पर फर्जी पट्टा बनवा लिया। इस फर्जी पट्टे के बनाने में छगन सिंह ने उसका भाई जो रेवेन्यू इंस्पेक्टर व उसके भाई किक सिंह व ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव ने उसका मकान हडपने की नीयत से फर्जी दस्तावेज पट्टा तैयार किया, जबकी यह मकान उसका है यह सभी पड़ोसी और गांव के लोग जानते है। छगन सिंह स्वयं ने वर्ष 2006 में एक वाद व प्रार्थना पत्र उसकी सम्पति के पड़ोसी व दल सिंह व उसके पुत्र राम सिंह व हरिसिंह के खिलाफ न्यायालय में पेश किया था, जिसमें भी उसने उत्तर दिशा में प्रार्थी का सामलाती पोल व चोक अंकित किया है व उस पर वादी के रूप में छगन सिंह के हस्ताक्षर है। उसमें छगन सिंह के द्वारा एक नक्शा भी पेश किया, जिसमें उस प्रार्थी का मकानख पोल व चौक सामलाती अंकित किए है व उस नक्शे में दो कमरे बताए है। वह कमरे भी प्रार्थी के है व जो स्वयं छगन सिंह ने कोर्ट में अपने हस्ताक्षर कर पेश किए, परन्तु प्रार्थी पिछले लम्बे समय से गुजरात में रह रहा है, जिससे उसका यह मकान तीनो भाईयो ने हड़पने की नीयत से सरपंच व सचिव से मिलकर षडयंत्र कर 20 दिसम्बर 2011 को पट्टा नम्बर 16, 17 छगन सिंह के नाम पर बनवा दिया। इस मकान को धोखे से हड़पने की नीयत से तीनो भाईयों ने व इनके परिचित व्यक्तियो ने मिलकर सरपंच व सचिव से मिलीभगत कर पट्टा बनवा दिया, जबकी नियमानुसार पट्टा जारी करने से पूर्व अखबार में प्रकाशित किया जाता है और मकान के पडोसियो के पट्ट की फाईल पर हस्ताक्षर कराए जाते है। इन्होने फर्जी पट्टा जारी करने की नीयत से कोई प्रक्रिया का पालन नहीं किया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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