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महाराष्ट्र में एनडीए के भीतर सीट बंटवारे पर फंसा पेच
By EditorialPublished on
महाराष्ट्र (Maharashtra) में चुनाव से पहले एनडीए (NDA) में सीट बंटवारे (seat sharing) पर पेच फंसा हुआ है। एनडीए में बीजेपी, शिवसेना (शिंदे) और एनसीपी (अजित) समेत 6 दल शामिल हैं।

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मुंबई। महाराष्ट्र (Maharashtra) में चुनाव से पहले एनडीए (NDA) में सीट बंटवारे (seat sharing) पर पेच फंसा हुआ है। एनडीए में बीजेपी, शिवसेना (शिंदे) और एनसीपी (अजित) समेत 6 दल शामिल हैं। इन दलों के बीच सीटों का बंटवारा होना है। कहा जा रहा है कि मुख्य रूप से 3 दलों के बीच ही सीट शेयरिंग का पेच नहीं सुलझ रहा है।
अजित पवार की एनसीपी महाराष्ट्र की करीब 90 सीटों पर दावेदारी कर रही है। इसी तरह शिवसेना (शिंदे) की दावेदारी 100-110 सीटों पर है। 3 छोटी पार्टियां भी 40 सीट पर ताल ठोक रही है। एनडीए में सीट शेयरिंग के विवाद को लेकर 2 चर्चा है। पहली चर्चा के मुताबिक अजित पवार की पार्टी को 50-55, एकनाथ शिंदे की पार्ट को 70-80 सीटें मिल सकती है। वहीं 140 सीटों पर बीजेपी चुनाव लड़ सकती है। दूसरी चर्चा के मुताबिक 20-25 सीटों पर तीनों ही दल फ्रेंटली फाइट के तहत चुनाव लड़ सकती है और बाकी के सीटों को मेरिट के हिसाब से बांट सकती है। महाराष्ट्र में करीब 55 ऐसी सीटें हैं, जहां पर तीनों ही दलों की दावेदारी है।
बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि महाराष्ट्र में एनडीए दलों के बीच सीट शेयरिंग पर बात नहीं बनी है। ऐसे में अजित पवार उम्मीदवारों के नाम का ऐलान क्यों कर रहे हैं? वो भी तब, जब उनकी ओर से घोषित उम्मीदवार नरहरि जिरवाल के नाम पर सियासी बवाल मच चुका है। जानकारों का कहना है कि अजित उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर 2 सियासी समीकरण एक साथ साध रहे हैं। पहला, अजित पवार ने जिन सीटों पर उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया है, वो सभी सीटें एनसीपी की सीटिंग है। अजित उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर गठबंधन के सहयोगी दलों को संदेश दे रहे हैं कि सीटिंग सीट के साथ कोई समझौता नहीं होगा। 2023 में एनसीपी के बगावत के वक्त 42 विधायक अजित पवार के साथ सरकार में शामिल हुए थे। उम्मीदवारों के नाम की घोषणा करने की दूसरी वजह अजित सियासी संदेश देने की कोशिश है। दरअसल, एनसीपी (अजित) को लेकर महाराष्ट्र के गलियारों में कई तरह की अटकलें एक साथ चल रही है। इनमें गठबंधन के भीतर उनकी स्थिति से लेकर सीट शेयरिंग में भूमिका तक शामिल हैं। कहा जा रहा है कि इन वजहों से वे नेता और कार्यकर्ता भी अजित का साथ छोड़ रहे हैं, जो एक साल पहले उनके साथ आए थे। अजित इसी स्थिति को मजबूत करने के लिए खुले मंच से उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर रहे हैं।

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