Samvatsari festival
मुंबई। श्रमण संघीय साध्वी नमिताश्री मसा ने संवत्सरी महापर्व (Samvatsari festival) पर कहा कि यह टूटे हुए दिलों को जोड़ने का पर्व है। इंसान के दिमाग में ठंडक मुंह में मिठास और हृदय में प्रेम भाव होना चाहिए। दूसरों की गलतियां ढूंढने की अपेक्षा स्वयं की गलतियां ढूंढेंगे तो अच्छा रहेगा। मन में समता के भाव एवं पश्चाताप के भाव रखो। मन के अन्दर नम्रता और विनय का भाव आना चाहिए। वैर विरोध वाले व्यक्ति को क्षमा करने एवं उससे क्षमा लेने का पर्व है। अंतर मन से आलोचना होनी चाहिए। हृदय की विशालता से क्षमा याचना करोगे तो सिद्ध गति को प्राप्त हो जाओगे। साध्वीवृन्द ने आलोचना का पाठ करवाकर सभी से हाथ जोड़ मान मोड़कर क्षमा याचना की । साध्वी विनयप्रभा मसा ने प्रत्याख्यान करवाकर महामांगलिक सुनाया। महिला मंडल ने धार्मिक नाटिका प्रस्तुत की। सायंकालीन पौषध क्रियाओं के साथ प्रतिक्रमण करके आपस में क्षमा याचना की। उपसंघ की सभी संस्थाओं के पदाधिकारियों सहित संघ सदस्यों के साथ में श्रावक श्राविकाओं की उपस्थिति रही। यह जानकारी देवीलाल ईन्टोदिया ने दी।
Editorial

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