mahakumbh
प्रयागराज (एजेंसी)। महाकुंभ (Mahakumbh) को लेकर मूंज (Moonj) से डेढ़ लाख अक्षय गंगा कलश (Akshay Ganga Kalash) का निर्माण कराया जा रहा है। मूंज के खूबसूरत टोकरी में मिट्टी के कलश (earthen pot) मैं गंगा जल होगा। इस टोकरी में ही पवित्र अक्षयवट का पत्ता रखा जएगा। इसको लैमिनेट कराया जाएगा कि जल्दी सूखे नहीं । गाय का गोबर भी होगा। ताम्रपत्र की तरह महाकुंभ के लोगो का प्रिंट किया कपड़ा भी टोकरी का हिस्सा होगा। इसे बनाने का कार्य शुरू हो गया है। इस नवाचार से मूंज क्राफ्ट उद्योग का रूप ले सकेगा तो स्थानीय शिल्प कला को बढ़ावा भी मिलेगा।
एक जिला एक उत्पाद योजना में शामिल मूंज उत्पाद के लिए मशहूर प्रयागराज
(Prayagraj)
जिले के महेवा गांव की 55 समूह की लगभग 550 महिलाओं को इस कार्य में लगाया गया है। कुल एक लाख 51 हजार अक्षय गंगा कलश तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसे तैयार करने में महेवा के आसपास के आठ गांवों और सोनभद्र, मीरजापुर, चित्रकूट, बांदा, महोबा जिले तथा मध्य प्रदेश के सीधी व शहडोल तथा बिहार के मधुबनी के हस्त शिल्पियों को भी लगाया जाएगा। यदि इन जिलों के शिल्पकार जुट जाएंगे तो अगले पांच माह में पांच लाख
मंगलकारी माना गया है मूंज
मूंज का धार्मिक व पौराणिक महत्व भी है। यह पुण्यकाल, लाभकारी, संस्कार को अग्रगण्य करने वाला है ।
ज्योतिषाचार्य पं. आचार्य देवेंद्र प्रसाद त्रिपाठी ने बताया कि मूंज अति पवित्र माना जाता है। उसकी बनी वस्तुएं भी पवित्रता को प्राप्त होती हैं। सभी 10 प्रकार के कुश में मूंज भी एक है।
कलश तैयार हो सकेंगे। एक कलश कीमत अभी 501 रूपये रखने का प्रस्ताव है। महाकुंभ के दौरान हर होटल, रेस्टोरेंट, फूड कोर्ट, टेंट कालोनी से लेकर टेंट सिटी तक यह कलश बिक्री के लिए रखा जाएगा।
मठ-मंदिरों से लेकर कुंभ मेला (Kumbh Mela) के सभी सेक्टर कार्यालयों, 15 विभागों के कार्यालयों में रखा जाएगा। मेला के विभिन्न बाजारों प्रदर्शनियों में इसके स्टाल लगाए जाएंगे। पर्यटन विभाग नोडल बनाया गया है।
Editorial

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