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चित्त समाधि का तात्पर्य है अशांति नहीं होना
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तेरापंथ महिला मंडल (Terapanth Mahila Mandal) कांदिवली एवं मालाड ने साध्वी डॉ. मंगलप्रज्ञा के सान्निध्य में आयोजन रखा। साध्वी चैतन्यप्रभा व शौर्यंप्रभा ने गीतिका द्वारा मंगलाचरण किया। साध्वी डॉ. मंगल प्रज्ञा ने जीवन शैली कैसे होनी चाहिए एवं पारिवारिक रिश्तों में हमारी भूमिका क्या है, इस पर विचार रखे।

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मुंबई। तेरापंथ महिला मंडल (Terapanth Mahila Mandal) कांदिवली एवं मालाड ने साध्वी डॉ. मंगलप्रज्ञा के सान्निध्य में आयोजन रखा। साध्वी चैतन्यप्रभा व शौर्यंप्रभा ने गीतिका द्वारा मंगलाचरण किया। साध्वी डॉ. मंगल प्रज्ञा ने जीवन शैली कैसे होनी चाहिए एवं पारिवारिक रिश्तों में हमारी भूमिका क्या है, इस पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि चित्त समाधि का तात्पर्य है अशांति नहीं होना अर्थात अपने मन में समाधि रहे, समाधान रहे, शांति रहे उसे चित्त समाधि कहा जाता है। पारसमल दूग्गड़ भावना कोठारी व विमला दूग्गड़ ने योग द्वारा चित्त समाधि के टिप्स बताए। कांदिवली अध्यक्ष विभा श्रीश्रीमाल ने स्वागत व मालाड अध्यक्ष कुसुम कोठारी ने आभार प्रकट किया। मुंबई तेरापंथ सभा उपाध्यक्ष दलपत बाबेल व संगीता चपलोत की उपस्थिति रही।

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