sovereign gold bonds
मुंबई। केंद्र सरकार (Central Government) द्वारा अब सोवरेन गोल्ड बॉण्ड्स (sovereign gold bonds) (एसजीबी) के आगामी हिस्से जारी करने की संभावना नहीं लग रही है क्योंकि सरकार अब इसे एक जटिल और खर्चीले साधन के तौर पर देख रही है।
इस महीने की शुरुआत में भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) ने 999 शुद्धता के गोल्ड के लिये रुपये 6,938 की एसजीबी योजना के शोधन मूल्य की घोषणा की थी। यह अगस्त 2016 के 3119 रुपये के इश्यू प्राइस के मुकाबले करीब 122 फीसदी ज्यादा थी।
इस बढ़ोत्तरी के बावजूद, शोधन मूल्य 23 जुलाई के केंद्रीय बजट के पूर्ववर्ती सप्ताह में औसत गोल्ड कीमत से करीब 4.5 फीसदी कम ही था। सरकार ने बजट में गोल्ड की कस्टम ड्यूटी में कटौती का ऐलान किया था जिसके बाद गोल्ड की कीमतों में गिरावट आई थी। सरकार ने गोल्ड पर इम्पोर्ट ड्यूटी 15 फीसदी से कम कर सीधे 6 फीसदी कर दी। इस फैसले के पीछे सरकार का मकसद जूलरी कारोबारियों की लागत में कमी लाना और इसके जरिये गोल्ड स्मगलिंग पर अंकुश लगाना था।
बजट के मुताबिक, सरकार एसजीबी जारी करने पर पहले ही अनमनी हो चुकी थी। 23 जुलाई को सरकार ने पूरे साल का अपना बजट पेश किया जिसमें वित्त वर्ष 2025 में जारी सकल एसजीबी के लिये 18,500 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया है जो फरवरी के अंतरिम बजट में प्रोजेक्टेड 29,638 करोड़ रुपये से करीब 38 फीसदी कम है।
एसजीबी की शुरुआत साल 2015 में की गई थी। पिछले वित्त वर्ष एसजीबी के जरिये सकल और शुद्ध उधारी क्रमश: 26852 करोड़ रुपये और 25,352 करोड़ रुपये थी। प्रत्यक्ष गोल्ड इम्पोर्ट्स को कम करने के लिये एक साधन के तौर पर एसजीबी तैयार की गई थी ताकि सरकार को अपने वित्तीय घाटे के प्रबंधन में मदद मिल सके। एसजीबी पर तकरीबन ढाई फीसदी की ब्याज दर अदा की जाती है जो अन्य निवेश साधनों के 6.5 फीसदी से 6.9 फीसदी के मानक ब्याज या रिटर्न की दर की तुलना में काफी कम था लेकिन इसकी खासियत यह थी कि इसमें ढाई फीसदी का निश्चित सालाना रिटर्न मिलता है जो अर्धवार्षिक तौर पर दिया जाता है। लेकिन इसमें आठ साल की मैच्युरिटी के बाद गोल्ड की मार्केट रेट के आधार पर भी रिटर्न के तौर पर फायदा मिलता है। लेकिन अब सरकार इस सोवरेन गोल्ड बॉन्ड्स के जरिये रकम जुटाने में दिलचस्पी नहीं ले रही और काफी कम संभावना है कि सरकार आगामी एसजीबी इश्यू जारी करेगी।
Editorial

Editorial

Next Story