Income Tax department
मुंबई। इनकम टैक्स विभाग (Income Tax Department) ने अपने अधिकारियों को उन पांच हजार मामलों पर पूरा ध्यान देने के निर्देश दिये हैं जिनमें टैक्स विभाग की 43 लाख करोड़ रुपये की टैक्स डिमांड बकाया है। इनकम टैक्स इन पांच हजार मामलों को निपटाने के जरिए अपनी कमाई में इजाफा करने और लंबित कानूनी मुकदमों के पचड़ों को कम करने की कोशिश में है।
मिली जानकारी के मुताबिक, आईटी विभाग के उच्च स्तरीय अधिकारियों को ऐसे तमाम मामलों के विश्लेषण के लिये विशेष टीमों के गठन के लिये निर्देशित किया गया है। इन्हें केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड को सितंबर अंत तक इन मामलों की सूची तैयार कर भेजनी है। विभाग का मानना है कि ज्यादा रकम के टैक्स बकाया के मामले जो कानूनी मुकदमों में फंसे हैं, उन्हें निपटाने के लिये अलग तरीके से काम करना होगा। जो टैक्स बकाया मामले 10 साल से ज्यादा पुराने हैं, उनकी समीक्षा की जा सकती है और उन मामलों में बकाया को माफ करने, समायोजित करने और अधिक सख्ती के साथ वसूली करने जैसे विभिन्न विकल्पों पर विचार करना होगा। जिन मामलों में बकायेदार का कोई अता-पता ही नहीं है, उन मामलों के लिये अलग रणनीति बनानी होगी।
दरअसल टैक्स डिमांड उन क्षेत्रों में से एक ऐसा क्षेत्र माना जा रहा है, जहां खतरे की घंटी बज रही है। लिहाजा अधिकारियों को और ज्यादा मुस्तैदी के साथ दस्तावेजी प्रमाणों और आंकड़ों से लैस होकर वर्तमान वित्त वर्ष के लिये टैक्स की वसूली को बेहतर करने की चुनौती है। जाहिर है, इसके लिये एक समान रवैया मददगार साबित नहीं होगा। अलग-अलग किस्म के मामलों को अलग – अलग तरीके से निपटाने की जरूरत होगी। सरकारी खर्च में हो रही लगातार बढ़ोत्तरी के चलते अब कमाई के नये विकल्प तलाशना जितना जरूरी है, उससे कहीं ज्यादा जरूरी है मौजूदा कमाई के साधनों का बेहतरीन इस्तेमाल करना। यही वजह है कि अब टैक्स विभाग ने टैक्स वसूली के जरिये कमाई बढ़ाने को अपना प्रमुख लक्ष्य बना लिया है।
विभाग ने करीब 16.7 लाख करोड़ की टैक्स वसूली का अनुमान लगाया है जबकि बकाया की वसूली के तौर पर 8 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया है। इसमें से 35 फीसदी से ज्यादा कमाई मुंबई से आने की उम्मीद है। टैक्स वसूली में दिल्ली और तमिलनाडु दूसरे और तीसरे नंबर पर हो सकते हैं जबकि इसके बाद पुडुचेरी का नंबर आता है।
Editorial

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