ED officer bribery
मुंबई। कुछ दिन पहले रिश्वतखोरी के आरोप में गिरफ्तार हुये प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारी (ED officer) संदीप सिंह ने अपनी पत्नी के जरिये सीबीआई (CBI) की इस कार्रवाई की वैधता को मुंबई उच्च न्यायालय (Mumbai High Court) में चुनौती दी है। सिंह ने अपनी याचिका में जहां सीबीआई द्वारा सर्वोच्च न्यायालय की ओर से निर्धारित नियम-कानूनों का पालन नहीं किेय जाने का हवाला दिया है तो वहीं उच्च न्यायालय ने अब सीबीआई से अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।
आरोपी संदीप सिंह ने अपनी याचिका में दलील दी है कि सीबीआई ने जब उसे 8 अगस्त को हिरासत में लिया तो उसे गिरफ्तारी के कारण की लिखित में जानकारी नहीं दी गई जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में इसे अनिवार्य करार दिया है। सीबीआई ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश और मौजूदा कानून का पालन किये बिना मनमाने तरीके से यह गिरफ्तारी की है, लिहाजा उनकी गिरफ्तारी पूरी तरह अवैध और गैरकानूनी है।
मालूम हो कि संदीप सिंह एक इनकम टैक्स अधिकारी है और फिलहाल वह प्रतिनियुक्ति पर ईडी में कार्यरत था। वह एक जांच टीम की अगुवाई कर रहा था जिसने हाल ही में मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में मुंबई के एक जूलरी कारोबारी के यहां छापेमारी की कार्यवाही की थी। मनी लॉन्ड्रिगं का यह मामला चीनी नागरिकों द्वारा नियंत्रित एक निवेश एप से जुड़ा हुआ था।
ईडी की दिल्ली टीम इस मामले की जांच कर रही थी। सिंह इस मामले में जांच अधिकारी नहीं था, लेकिन आरोप है कि उसने जूलर के बेटे को इस मामले में गिरफ्तार करने की धमकी देते हुए जूलर से 20 लाख रुपये रिश्वत की मांग की थी। सिंह ने जूलर को हवाला के जरिये रिश्वत की यह रकम दिल्ली में उसे पहुंचाने को कहा था। जूलर ने इसके बाद सीबीआई से संपर्क कर सिंह के खिलाफ कदाचार का मामला दर्ज कराया था। सीबीआई ने जाल बिछाया और संदीप सिंह द्वारा रिश्वत की रकम लिये जाने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। सिंह के वकील सुजय कांटावाला ने अदालत में दलील दी है कि सिंह की गिरफ्तारी गैरकानूनी है और इसी के साथ दी गई रिमांड की भी कोई वैधता नहीं है।
Editorial

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