Pooja Khedkar
नई दिल्ली (एजेंसी)। नखरेबाज आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर (IAS officer Pooja Khedkar) की बर्खास्तगी के साथ ही केंद्र सरकार (Central Government) ने विकलांगता प्रमाण पत्र (Disability Certificate) जारी करने के नियमों को सख्त बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। केंद्र सरकार ने बुधवार को विकलांग व्यक्तियों के अधिकार के नियमों में संशोधन का मसौदा प्रकाशित किया। इसके तहत अब इसकी प्रक्रिया लंबी कर दी गई है। सरकारी सूत्रों ने बताया है कि संशोधनों का मसौदा तैयार करते समय इस विवाद पर विचार किया गया था।
संशोधित नियमों के तहत विकलांग लोगों (disabled people) को अनिवार्य रूप से अपनी पहचान का प्रमाण, छह महीने से अधिक पुराना फोटो और आधार कार्ड जमा करना होगा। विकलांगता प्रमाण पत्र के लिए आवेदन प्राप्त करने और प्रक्रिया शुरू करने के लिए केवल चिकित्सा अधिकारियों को ही सक्षम माना जाएगा। इसमें यह भी सुझाव दिया गया है कि इसमें लगने वाले समय को एक से तीन महीने तक बढ़ाया जाना चाहिए।
असली आवेदकों को नुकसान होगा
विकलांगता क्षेत्र के विशेषज्ञों और कार्यकर्ताओं ने कहा कि ये प्रस्तावित संशोधन फर्जी विकलांगता प्रमाण-पत्रों की समस्या से निपटने में बहुत कारगर नहीं होंगे। उनका तर्क है कि भ्रष्टाचार (Corruption) के कारण ऐसा होता है। उन्होंने कहा कि संभावित नए नियम वास्तविक आवेदकों के लिए सिस्टम से गुजरना मुश्किल बना देंगे।
पहले से अधिक दस्तावेज
पिछले साल सरकार ने सबसे पहले सभी दिव्यांगों के लिए लाभ प्राप्त करने के लिए डीआईडी कार्ड रखना अनिवार्य कर दिया था। डीआईडी कार्ड के लिए आधार को अनिवार्य कर दिया था।
सरकार ने विकलांग लोगों के लिए रंग- कोडित यूडीआईडी कार्ड का भी प्रस्ताव दिया है। मसौदा संशोधनों में 40% से कम विकलांगता वाले लोगों के लिए सफेद कार्ड, 40% से 80% के बीच विकलांगता वाले लोगों के लिए पीले कार्ड और 80% से अधिक विकलांगता वाले लोगों के लिए नीले कार्ड का सुझाव दिया गया है। यदि संबंधित चिकित्सा प्राधिकरण दो साल से अधिक समय तक आवेदन पर निर्णय लेने में असमर्थ है तो आवेदन को समाप्त किया जा सकता है। इसे फिर से सक्रिय करने के लिए प्राधिकरण से संपर्क करना होगा।
Editorial

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