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मुंबई के जूलर से 20 लाख की रिश्वत लेते ईडी अधिकारी रंगे हाथों गिरफ्तार
By EditorialPublished on
सीबीआई (CBI) ने बुधवार को दिल्ली में रिश्वतखोरी के एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के एक अधिकारी (ED officer) को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी संदीप सिंह ईडी में सहायक निदेशक स्तर का अधिकारी है। उसे सीबीआई ने मुंबई के एक जूलर से 20 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।

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मुंबई। सीबीआई (CBI) ने बुधवार को दिल्ली में रिश्वतखोरी के एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के एक अधिकारी (ED officer) को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी संदीप सिंह ईडी में सहायक निदेशक स्तर का अधिकारी है। उसे सीबीआई ने मुंबई के एक जूलर से 20 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।
उधर ईडी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुये भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति के तहत आरोपी अधिकारी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरु कर दी है। आरोपी के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 (पीएमएलए) के तहत एक ईसीआईआर मामला दर्ज किया है। फिलहाल आरोपी अधिकारी को ईडी ने निलंबित कर दिया है और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) को आरोपी के प्रत्यावर्तन की कार्यवाही शुरू कर दी गई है।
अधिकारियों के मुताबिक, सिंह को मई 2023 में ईडी में सहायक निदेशक के तौर पर नियुक्त किया गया था। गुरूवार को सीबीआई और ईडी की टीम ने सिंह के दफ्तर और रिहाईशी ठिकानों पर सबूत जुटाने के लिये छापेमारी और तलाशी की कार्यवाही की थी। इसी छापेमारी के बाद एफआईआर दर्ज की गई और सिंह को गिरफ्तार किया गया था।
सूत्रों के मुताबिक, मुंबई सीबीआई एसीबी ने एक जाल बिछाकर सिंह को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। मुंबई में ईडी के एक छापे के बाद आरोपी अधिकारी ने कथित तौर पर जूलर से रिश्वत की मांग की थी। आरोपी अधिकारी ने इस जूलर को धमकाया था कि यदि रिश्वत की रकम नहीं दी गई तो जूलर के बेटे को फर्जी मामले में फंसा दिया जायेगा। जूलर की इसी शिकायत के आधार पर एसीबी ने 7 अगस्त को दिल्ली में जाल बिछाया और आरोपी अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया।
6 अगस्त को ही वडाला के जूलर विपुल हरीश ठक्कर ने एसीबी में सिंह के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी संदीप सिंह को एसीबी ने दिल्ली के लाजपत नगर के मार्केट में गिरफ्तार किया था।
सिंह ने अपने साथियों के साथ मिलकर जूलर से 20 लाख रुपये ऐंठने की पूरी योजना बनाई थी। जूलर को आरोपी ने उसके बेटे निहार ठक्कर की रिहाई के बदले में यह रकम मांगी थी। जूलर के यहां छापेमारी की यह कार्रवाई असल में एक मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा थी, जिसके लिये दिल्ली, उत्तराखंड और बेंगलुरू में पुलिस ने आपराधिक मामले दर्ज कर रखे थे। आरोपी अधिकारी सिंह इस ईडी की जांच टीम में सर्च वारंट प्राधिकृत अधिकारी के तौर पर कार्य कर रहा था।

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