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नए आपराधिक कानूनों में भारतीयता की आत्मा पुनः स्थापित
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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (CM Bhajanlal Sharma) ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) के प्रयासों से 1 जुलाई से लागू हुए नवीन भारतीय न्याय संहिता (Indian Judicial Code), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (Indian Civil Defense Code) तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) से संविधान की मूल भावना को बल मिला है। पुराने कानूनों में केवल सजा का प्रावधान था, लेकिन अब इन नए कानूनों में न्याय पर जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि राजस्थान (Rajasthan) सरकार अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर क
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कार्यालय संवाददाता जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (CM Bhajanlal Sharma) ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) के प्रयासों से 1 जुलाई से लागू हुए नवीन भारतीय न्याय संहिता (Indian Judicial Code), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (Indian Civil Defense Code) तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) से संविधान की मूल भावना को बल मिला है। पुराने कानूनों में केवल सजा का प्रावधान था, लेकिन अब इन नए कानूनों में न्याय पर जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि राजस्थान (Rajasthan) सरकार अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। अपराधमुक्त राजस्थान बनाने तथा शीघ्र एवं सुलभ न्याय के लिए ये कानून मील का पत्थर साबित होंगे।
शर्मा सोमवार को नवीन आपराधिक कानूनों को आमजन तक पहुंचाने के संबंध में गृह विभाग की उच्चस्तरीय बैठक ले रहे थे। बैठक में सभी 50 जिलों से पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं सीएलजी सदस्य, सुरक्षा सखी, ग्राम रक्षक और पुलिस मित्र तथा आमजन वर्चुअल रूप से जुड़ें।
प्रधानमंत्री जो कहते है, वो करके दिखाते हैं
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से कहा था कि हमें जल्द से जल्द गुलामी की मानसिकता और गुलामी के प्रतीक चिह्नों को समाप्त कर नए आत्मविश्वास से भरे नए भारत (India) की स्थापना करनी है। इसके अनुसरण में उन्होंने आज के समय में अनुपयोगी हो चुके पुराने आपराधिक कानूनों को हटाकर उनके स्थान पर नवीन आपराधिक विधियों को लागू करवाया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जो कहते हैं, वो कर के भी दिखाते हैं।
नए कानूनों में महिलाओं, बच्चों तथा पीड़ितों पर विशेष ध्यान
शर्मा ने कहा कि नए कानूनों में पीड़ित को जल्द न्याय उपलब्ध कराने और दोषी के स्थान पर पुनर्वास की भावना को प्रधानता दी गई है। साथ ही, महिलाओं, बच्चों तथा ग्रामीणों के हितों को बढ़ावा देने के प्रावधानों को भी शामिल किया गया है। इन नए आपराधिक कानूनों में लिंग निरपेक्ष शब्दों द्वारा लैंगिक समानता को बढ़ावा तथा मानसिक विमंदितों के प्रति बौद्धिक विकलांगता जैसे शब्दों का उपयोग किया गया है।

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