Chhatrapati Shivaji's Waghnakha
मुंबई। ब्रिटेन के विक्टोरिया और अल्बर्ट म्यूजियम से छत्रपति शिवाजी का बाघनख (Chhatrapati Shivaji's Waghnakha) हथियार मुंबई लाया गया। महाराष्ट्र के संस्कृति मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि बाघनख को 19 जुलाई से सातारा के छत्रपति शिवाजी म्यूजियम में 7 महीने तक प्रदर्शनी में रखा जाएगा। मुनगंटीवार ने पिछले हफ्ते विधानसभा में कहा था कि बाघनख का प्रयोग छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा किया जाता था। उनकी टिप्पणी एक इतिहासकार के दावे पर थी, जिसमें कहा गया है कि छत्रपति शिवाजी ने सन् 1659 में बीजापुर के सेनापति अफजल खान को बाघनख से मारा था। ये पहले से ही सतारा में था।
बाघनख के बारे में यह मशहूर है कि यह छत्रपति शिवाजी महाराज का था। 1659 की लड़ाई के दौरान शिवाजी महाराज धातु के पंजे या बाघनख को अपने हाथ में छुपाए हुए थे। इसी से उन्होंने अफजल खान की आंतें बाहर निकाल दी थीं।
उन्होंने इस बात की खारिज किया कि नख को लंदन से महाराष्ट्र लाने के लिए करोड़ों रूपए खर्च किए गए हैं। उन्होंने कहा कि नख के कॉन्ट्रैक्ट और इसे भारत लाने में 14 लाख 8 हजार रूपए का खर्चा आया है।
बाघनख को महाराष्ट्र लाया जाना एक प्रेरणादायक क्षण
राज्य के आबकारी मंत्री शंभुराज देसाई 16 जुलाई को कहा था कि बाघनख को महाराष्ट्र लाया जाना एक प्रेरणादायक क्षण है। नख का सतारा में भव्य स्वागत किया जाएगा। इसे कड़ी सुरक्षा के बीच लाया गया है और बुलेटप्रूफ कवर रखा गया है। देसाई सतारा के संरक्षक मंत्री भी हैं। उन्होंने छत्रपति शिवाजी म्यूजियम का दौरा भी किया है।
देसाई ने कहा कि पहले लंदन के म्यूजियम ने पहले एक साल के लिए नख भारत भेजने पर सहमति जताई थी, लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने नख को 3 साल के लिए राज्य में प्रदर्शन के लिए सौंपने के लिए राजी किया। उन्होंने कहा कि काफी प्रयासों के बाद सीएम एकनाथ शिंदे की सरकार के सफल प्रयासों के चलते बाघनख को महाराष्ट्र लाया गया।
Editorial

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