silver price rise
मुंबई। स्मार्ट इनवेस्टर्स दूरगामी फायदों का आकलन करते हुये चांदी (Silver) की खरीदारी में निवेश पर जोर लगा सकते हैं।जानकारों की राय है कि अगले 12 से 15 महीनों में चांदी बाकी के वित्तीय साधनों के मुकाबले कहीं आगे निकल सकती है।
वित्तीय सलाहकार चांदी की चाल को लेकर बहुत ज्यादा आश्वस्त नजर आ रहे हैं। सलाहकार हालांकि केवल चांदी की कीमतों में गिरावट के दौरान ही खरीदारी या निवेश की सलाह दे रहे हैं।
दरअसल औद्योगिक उत्पादन में चांदी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है। चीन में भी सुधार की बड़ी गुंजाइश नजर आ रही है। लिहाजा निवेशक आनेवाले समय में चांदी की खपत और मांग को लेकर उत्साहित है। यही वजह है कि इस वक्त माना जा रहा है कि गिरावट के मौके पर चांदी में खरीदारी आनेवाले तीन से छह महीनों के लिये फायदेमंद साबित होगी। पिछले करीब एक साल से औद्योगिक मांग के चलते चांदी की मांग में भी बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। साल 2024 में चांदी रुपये 91,700 प्रति किलोग्राम की दर पर कारोबार कर रही है और उसने निवेशकों को 24 फीसदी का बेहतरीन रिटर्न दिया है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश से भी चांदी की चमक बढ़ने की संभावना ज्यादा दिखाई दे रही है। ब्याज की दरें जब गिरती हैं तो चांदी की कीमतों में मजबूती देखने को मिलती है। चांदी की मांग और आपूर्ति में भी एक बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। ईलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते चलन और 5जी प्रौद्योगिकी के उभार के मद्देनजर चांदी की जरूरत भी बढ़ी है। इन सभी क्षेत्रों में चांदी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है। यही वजह है कि खपत और मांग के लिहाज से चांदी मजबूत रास्ते पर है। चांदी की लगातार बढ़ती खपत और इस्तेमाल के चलते यह अंतर नजर आ रहा है। पिछले करीब तीन-चार साल से मांग और आपूर्ति में यह फासला नजर आ रहा है। यही वजह है कि फिलहाल चांदी पर दांव लगाना आनेवाले वक्त में निवेशकों के लिये फायदेमंद होने जा रहा है।
Editorial

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