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नई दिल्ली (एजेंसी)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh) अब बंचित वर्ग में संगठन के संदर्भ में फैली भ्रांतियों को दूर कर उसे साधने की मुहिम शुरू करेगा। झारखंड (Jharkhand) की राजधानी रांची (Ranchi) में अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक (Indian Province Promotional Meeting) में इसके लिए देश भर के अभावग्रस्त बस्तियों में सेवा कार्य शुरू करने और इसमें सभी अनुषांगिक संगठनों की भूमिका तय करने पर सहमति बनी है।
बैठक में शताब्दी वर्ष की योजनाओं, संघ प्रमुख के आगामी एक वर्ष के राष्ट्रीय प्रवास सहित कई अन्य विषयों पर भी चर्चा हुई है। संघ सूत्रों ने बताया कि बंचित वर्ग तक मजबूत पैठ बनाने के लिए शताब्दी वर्ष तक ऐसे सभी अभावग्रस्त बस्तियों और 5 हजार से अधिक जनसंख्या वाले गांवों में व्यापक सेवा कार्य शुरू करने की योजना बनी है। वंचित, उपेक्षित और अभावग्रस्त लोगों तक शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक संस्कार पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। इसके लिए संघ ने सेवा भारती, सेवा न्यास सहित करीब डेढ़ दर्जन संगठनों को कमर कसने का निर्देश दिया है। शाखा प्रमुखों को भी ऐसी बस्तियों के चयन के निर्देश दिए गए हैं।
पहले के प्रयास रहे सफल
संघ ने वंचित वर्ग में पैठ बढ़ाने के लिए सामाजिक समरसता मुहिम चलाई थी। इसके तहत एक गांव, एक कुआं, एक श्मशान अभियान का बेहद सकारात्मक असर पड़ा। अब संघ ने इसी मुहिम के विस्तार के तहत अभावग्रस्त बस्तियों में वृहद सेवा कार्य योजना तैयार की है। संघ सूत्रों का कहना है कि उसके अनुषांगिक संगठन पहले से ही 1.35 लाख सेवा कार्य चला रहे हैं। जरूरत इसकी वंचित वर्ग से जुड़े इलाकों तक विस्तार करने की है।
लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि, फैसले का होना चाहिए सम्मान
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा, लोकतंत्र (Democracy) में जनता सबसे ऊपर होती है। सभी राजनीतिक दल चुनाव में अपनी बात लेकर लोगों के पास जाते हैं। लोग उन बातों के आधार पर अपने निर्णय देते हैं। जनता ने अपना फैसला दे दिया है। और सबको उसका सम्मान करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि धर्मांतरण पर सख्ती से रोक लगनी चाहिए और कानून का पालन होना चाहिए।
जॉइन आरएसएस अभियान हिट: 2012 में संघ से ऑनलाइन जुड़ने के लिए शुरू किया गया जॉइन आरएसएस अभियान सफल रहा है। वेबसाइट के माध्यम से हर साल एक से सवा लाख लोग संघ से जुड़ कर उसको गतिविधियों में हिस्सा ले रहे हैं। इस साल जून तक 67 हजार लोग संघ से जुड़ने की इच्छा जता चुके हैं। अब समन्वय बैठक पर नजर संघ की प्रांत प्रचारक बैठक के बाद अब सबकी निगाहें 31 अगस्त से दो सितंबर तक केरल के पलक्कड़ में होने वाली समन्वय बैठक पर होगी। इस बैठक में संघ के सभी अनुषांगिक संगठनों के अलावा भाजपा के प्रतिनिधि भी हिस्सा लेंगे। चुनाव नतीजे के बाद उस पर मंथन के संदर्भ में यह पहली बैठक होगी।
Editorial

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