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रामलला के लिए शबरी के बेर लेकर पहुंचे छत्तीसगढ़ के सीएम
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रामलला (Ramlalla) निहाल हुए। ननिहाल छत्तीसगढ़ (Nanihal Chhattisgarh) से उनके लिए ढेर सारे उपहार आए। शबरी धाम (Shabari Dham) शिवरीनारायण के बेर (Ber) भी मिले। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय (Vishnu Dev Sai) शनिवार को ममत्व व अपनत्व की सुगंध से भरे विष्णुभोग चावल (Vishnubhog rice), कोसा वस्त्र ( kosa cloth,), कारी लड्डू (kari laddu), अनरसा (anarsa), चिरौंजी (chironji) और सीताफल (custard apple) लेकर पूरी कैबिनेट के साथ अयोध्या (Ayodhya) पहुंचे और रामलाला के दर्शन किए।

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अयोध्या (एजेंसी)। रामलला (Ramlalla) निहाल हुए। ननिहाल छत्तीसगढ़ (Nanihal Chhattisgarh) से उनके लिए ढेर सारे उपहार आए। शबरी धाम (Shabari Dham) शिवरीनारायण के बेर (Ber) भी मिले। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय (Vishnu Dev Sai) शनिवार को ममत्व व अपनत्व की सुगंध से भरे विष्णुभोग चावल (Vishnubhog rice), कोसा वस्त्र ( kosa cloth,), कारी लड्डू (kari laddu), अनरसा (anarsa), चिरौंजी (chironji) और सीताफल (custard apple) लेकर पूरी कैबिनेट के साथ अयोध्या (Ayodhya) पहुंचे और रामलाला के दर्शन किए।
सीएम साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ माता कौशल्या की नगरी है। वहां भगवान राम का ननिहाल है। मामा प्रदेश से हम आज छत्तीसगढ़ की खुशहाली की प्रार्थना करने आए हैं। हम सौभाग्यशाली हैं कि प्रभु श्रीराम ने 14 साल के वनवास के करीब 10 वर्ष छत्तीसगढ़ में बिताए। वहां माता शबरी के जूठे बेर भी खाए और नवधा भक्ति का ज्ञान भी दिया। साय ने कहा कि राम नगरी और मां कौशल्या के नगर छत्तीसगढ़ का अटूट रिश्ता है। रामचरितमानस (Ramcharitmanas) के अरण्यकांड (Aranyakand) में बताया गया है कि जब शबरी स्वयं को नीच, अधम और मंदबुद्धि कहते हुए प्रभु श्रीराम की स्तुति करने में संकोच कर रही थीं, तब श्रीराम ने शबरी को नवधा भक्ति का ज्ञान दिया।
श्रीराम (Shri Ram) ने शबरी से कहा कि भगवान के निकट जाति, धर्म, कुल और चतुराई का कोई मोल नहीं होता। वह तो सिर्फ भक्ति के नाते को सच्चा नाता मानते हैं।

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