✕
प्रयागराज से वर्ष में 330 दिन चलेंगे बड़े जलयान
By EditorialPublished on
प्रयागराज (Prayagraj) से हल्दिया (haldiya) तक गंगा नदी (River Ganga) में जल परिवहन (water transport) के लिए मानक अनुरूप पानी की उपलब्धता के साथ मोटी गाद जमने से न्यूनतम जलस्तर बनाए रखना गंभीर चुनौती है। केंद्र सरकार (Central government) ने करीब 5369 करोड़ रूपये की जलमार्ग विकास (waterway development) परियोजना स्वीकृत की है। भारतीय अंतरदेशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) का ग्लोबल टेंडर इसी महीने पूरा होगा। ड्रेजिंग का कार्य 6 वर्ष में पूरा होगा। वर्ष में न्यूनतम 330 दिनों तक नदी की गहराई ढाई से तीन मीटर

x
वाराणसी (एजेंसी)। प्रयागराज (Prayagraj) से हल्दिया (haldiya) तक गंगा नदी (River Ganga) में जल परिवहन (water transport) के लिए मानक अनुरूप पानी की उपलब्धता के साथ मोटी गाद जमने से न्यूनतम जलस्तर बनाए रखना गंभीर चुनौती है। केंद्र सरकार (Central government) ने करीब 5369 करोड़ रूपये की जलमार्ग विकास (waterway development) परियोजना स्वीकृत की है। भारतीय अंतरदेशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) का ग्लोबल टेंडर इसी महीने पूरा होगा। ड्रेजिंग का कार्य 6 वर्ष में पूरा होगा। वर्ष में न्यूनतम 330 दिनों तक नदी की गहराई ढाई से तीन मीटर बनाए रखना लक्ष्य है, जिससे 1500 से 2000 डीडब्ल्यूटी (डेडवेट टनेज) क्षमता के बड़े जलयानों का भी संचालन हो सके। प्रयागराज से हल्दिया तक कार्गो जलयान के संचालन की भी तैयारी है। आईडब्ल्यूएआई वाराणसी (Varanasi) के कार्यालय प्रभारी आरसी पाण्डेय ने बताया कि अक्टूबर नवंबर से गंगा में ड्रेजिंग का काम शुरू हो सकता है। टेंडर फाइनल किया जा रहा है। कई चरणों में काम होगा। नदी में गहराई बढ़ेगी तो निश्चित रूप से बड़े जलपोतों का संचालन संभव होगा। ड्रेजिंग का काम कोलकाता की तरफ से शुरू भी हो गया है। जलमार्ग के लिए आधुनिक इको सिस्टम विकसित करने की तैयारी है। आधुनिक नेविगेशन से लैस फ्लोटिंग टर्मिनल की संख्या भी बढ़ाई जाएगी।
मल्टीमॉडल टर्मिनल, नेविगेशनल लॉक, जेटी, बैराज व चैनल मार्किंग सिस्टम को व्यवस्थित किया जाएगा। इससे उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार, झारखंड और बंगाल तक जल परिवहन का विकास होगा। जलमार्ग लिंकेज का लाभ उठाते हुए मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी के आधार पर बांग्लादेश और उत्तर पूर्व भारत के लिए एकीकृत विकास मॉडल बनेगा। योजना का उद्देश्य करीब 5000 किमी लंबे प्राकृतिक जलमार्ग के जरिये भारत, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और म्यांमार के बीच बेहतर कनेक्टिविटी स्थापित करना है। जलमार्ग से पड़ोसी देशों संग व्यापार और आवाजाही को सुगम बनाया जा सकेगा। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने प्राधिकरण को क्षेत्रीय कनेक्टिविटी परियोजना और पूर्वी जलमार्ग कनेक्टिविटी परिवहन ग्रिड परियोजना लागू करने के आदेश दिए हैं। इसमें भारतीय उपमहाद्वीप के देशों यानी भारत, बांग्लादेश के बीच इंटरमॉडल लाजिस्टिक लिंकेज विकसित होगा।

Editorial
Next Story
Related News
X
