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पुतिन-मोदी की जादू की झप्पी' से चीन को लगी मिर्ची
By EditorialPublished on
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की हालिया रूस (Russia) यात्रा ने न केवल भारत (India)-रूस संबंधों कोनई ऊंचाईयों पर पहुंचाया, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भी बड़ी चर्चा को जन्म दिया। पांच साल बाद रूस की धरती पर कदम रखते ही मोदी का स्वागत गर्मजोशी और शाही तरीके से हुआ, जो दोनों देशों के बीच गहरे संबंधों को दर्शाता है। यह यात्रा खास इसलिए भी रही क्योंकि यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद यह मोदी की पहली मॉस्को यात्रा थी, जिस पर अमेरिका समेत पश्चिमी देशों की खास नजर थी। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Presid
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नई दिल्ली (एजेंसी)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की हालिया रूस (Russia) यात्रा ने न केवल भारत (India)-रूस संबंधों कोनई ऊंचाईयों पर पहुंचाया, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भी बड़ी चर्चा को जन्म दिया। पांच साल बाद रूस की धरती पर कदम रखते ही मोदी का स्वागत गर्मजोशी और शाही तरीके से हुआ, जो दोनों देशों के बीच गहरे संबंधों को दर्शाता है। यह यात्रा खास इसलिए भी रही क्योंकि यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद यह मोदी की पहली मॉस्को यात्रा थी, जिस पर अमेरिका समेत पश्चिमी देशों की खास नजर थी। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (President Vladimir Putin) ने प्रधानमंत्री मोदी की शान में कोई कसर नहीं छोड़ी। इस यात्रा के दौरान प्र.म. मोदी को रूस के सर्वोच्च सम्मान से नवाजा गया, जो दोनों देशों के बीच सम्मान और विश्वास को और भी मजबूत बनाता है। पुतिन और मोदी का गर्मजोशी से गले मिलना कई मायनों में महत्वपूर्ण था। उनका गले मिलना यह संकेत था कि रूस को पश्चिमी दबाव के संतुलन के लिए केवल चीन पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। यह पश्चिम के लिए एक स्पष्ट संदेश भी था कि भारत किसी एक खेमे में बंधकर नहीं रहेगा।

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