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अबकी बार, बस नैया पार सहयोगियों के भरोसे सरकार
By EditorialPublished on
लोकसभा चुनाव (Loksabha Election) के परिणामों ने एनडीए गठबंधन (alliance) ने बहुमत का आंकड़ा छू लिया हैं लेकिन अबकी बार 400 पार का नारा और एग्जिट पोल के सभी अनुमान इस बार गलत साबित हुए हैं। मंगलवार को जैसे ही परिणाम आना शुरू हुए। कई जगह पर एनडीए गठबंधन मात खाता हुआ दिखाई दिया।

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नई दिल्ली (एजेंसी)। लोकसभा चुनाव (Loksabha Election) के परिणामों ने एनडीए गठबंधन (alliance) ने बहुमत का आंकड़ा छू लिया हैं लेकिन अबकी बार 400 पार का नारा और एग्जिट पोल के सभी अनुमान इस बार गलत साबित हुए हैं। मंगलवार को जैसे ही परिणाम आना शुरू हुए। कई जगह पर एनडीए गठबंधन मात खाता हुआ दिखाई दिया।
खास तौर पर भाजपा (BJP) में कांग्रेस (Congress) व अन्य दलों से आए नेताओं को मुंह की खानी पड़ी। इसी तरह महाराष्ट्र (Maharashtra) में भी भाजपा को नुकसान उठाना पड़ा। उत्तर प्रदेश जो भाजपा का गढ़ माना जा रहा था वहां से भी भाजपा की उम्मीदें टूट सी गई। समाजवादी पार्टी ने काफी नुकसान पहुंचाया। यहां पर एनडीए को 30 सीटों का पिछले चुनाव के मुकाबले नुकसान हुआ। राजस्थान में भाजपा को 11 सीटों का बहुत बड़ा नुकसान हुआ। लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) अपने बेटे वैभव गहलोत की सीट नहीं बचा पाए और कांग्रेस के दिग्गज पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी (CP Joshi) भीलवाड़ा से साढ़े 3 लाख वोटों से ज्यादा से चुनाव हार गए। अमेठी में मोदी सरकार की केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी (Smriti Irani) को राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के पीए रहे किशोरीलाल ने पटखनी दे दी। चुनाव में भाजपा की ओर से जोर-शोर से उठाया गया राम मंदिर का मुद्दा भी आयोध्या में भाजपा को जीत नहीं दिला पाया। बंगाल में ममता दीदी का जादू फिर सिर चढ़कर बोला जहां पिछली बार के मुकाबले इस बार भाजपा को 5 सीटों का नुकसान हुआ। मध्यप्रदेश एवं गुजरात में भगवा का परचम फिर से फहराया।
मध्यप्रदेश में सभी 29 सीटें भाजपा ने अपने नाम कर ली एवं गुजरात में 26 में से 25 सीटों पर जीत दर्ज की। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने 7 लाख 44 हजार 716 वोटों के अंतर से विशाल जीत दर्ज की। कांग्रेस की बात करें तो राहुल गांधी वायनाड और रायबरेली दोनों सीटों से लगभग साढ़े तीन लाख से अधिक वोटों से जीत गए। अब देखने वाली बात होगी कि वे किसे रखते है, किसे छोड़ते हैं। कर्नाटक व तमिलनाडु में मोदी की गारंटी काम नहीं आई। कर्नाटक में भाजपा की 9 सीटें कम हुई तो कांग्रेस को 8 सीटों का फायदा होगा। तमिलनाडु में अन्नामलाई का जादू नहीं चला व भाजपा का खाता भी नहीं खुला वहीं तेलंगाना के हैदराबाद में असदुद्दीन औवेसी ने पांचवीं बार जीत का परचम फहराया, भाजपा की माधवी लता को 3 लाख से अधिक वोटों से हराया। इन सबके बीच ओडीसा में भाजपा को राहत मिली। वहां विधानसभा में बहुमत हासिल कर लिया तो लोकसभा में 19 सीटें जीतीं। दिल्ली में केजरीवाल की आप-कांग्रेस गठबंधन का सूपड़ा साफ हो गया। तमिलनाडु व पंजाब में भाजपा का खाता नहीं खुला। केरल में भाजपा का खाता खुल गया व एक सीट जीती।

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