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सफेद संगमरमर की होगी राजा राम की मूर्ति
By EditorialPublished on
भूतल में स्थापित बालक राम (Ram) की मूर्ति श्याम शिला में गढ़ी गई है, लेकिन प्रथम तल पर स्थापित होने वाले रामदरबार (Ramdarbar) की सभी मूर्तियां सफेद संगमरमर (white marble) से निर्मित होंगी। राम दरबार में राजा राम सहित माता सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुहन व हनुमान जी की मूर्तियां स्थापित की जाएंगी। राम दरबार की स्थापना का काम दिसंबर के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा।

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अयोध्या (एजेंसी)। भूतल में स्थापित बालक राम (Ram) की मूर्ति श्याम शिला में गढ़ी गई है, लेकिन प्रथम तल पर स्थापित होने वाले रामदरबार (Ramdarbar) की सभी मूर्तियां सफेद संगमरमर (white marble) से निर्मित होंगी। राम दरबार में राजा राम सहित माता सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुहन व हनुमान जी की मूर्तियां स्थापित की जाएंगी। राम दरबार की स्थापना का काम दिसंबर के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा।
राममंदिर निर्माण समिति (Ram Mandir Construction Committee) की बैठक सोमवार से राम जन्मभूमि (Ram Janmabhoomi) परिसर में शुरू हुई। बैठक से पहले नृपेंद्र मिश्र ने मंदिर निर्माण की प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रामदरबार, सप्त मंडपम व परकोटे में बनने वाले मंदिरों की मूर्तियां संगमरमर की होंगी। संगमरमर राजस्थान के मकराना से आएंगे। जयपुर (Jaipur) के कारीगर मूर्तियों का निर्माण करेंगे। बताया कि सप्त मंडपम में सात मंदिर बनने हैं। इनके निर्माण का कार्य अक्तूबर तक पूरा हो जाएगा। परकोटे के मंदिर की मूर्तियां भी संगमरमर की बनेंगी। परकोटे में भी छह मंदिर बनने हैं। हालांकि परकोटे में बन रहे शिवमंदिर की मूर्ति अलग पत्थर से बनेगी। पत्थर का चयन किया जा रहा है। नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि शेषावतार मंदिर की आधारशिला में बदलाव किया जाएगा। परीक्षण में पाया गया है कि इसकी आधारशिला करीब 25 साल पुरानी है, इसलिए मंदिर की नई आधारशिला तैयार की जाएगी, जो पत्थरों से निर्मित होगी। बताया कि राम मंदिर परिसर में ऑडिटोरियम के निर्माण के लिए जुलाई के प्रथम सप्ताह में फाउंडेशन का कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा। ऑडिटोरियम का कार्य 12 महीने में पूरा कर लिया जाएगा। यहां संतों के विश्राम का स्थान भी बनाया जाएगा।
रामकथा संग्रहालय के जीर्णोद्धार का काम शुरू
बताया कि रामकथा संग्रहालय (Ramkatha Museum) के जीर्णोद्धार का काम शुरू कर दिया गया है। यहां स्थापित गैलरियों का निर्माण नए तरीके से किया जाएगा। यहां रामायण कालीन वस्तुएं सहेजी जाएंगी। राममंदिर आंदोलन के 500 सालों के संघर्ष को भी दर्शाया जाएगा। रामकथा का दर्शन आधुनिक तकनीक के माध्यम से भक्त कर सकेंगे। यहां पहले से जो धरोहर सुरक्षित रखे गए हैं, उन सभी को नई वीथिकाओं में प्रदर्शित किया जाएगा।

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