BJP or India Alliance who will win
प्रातःकाल संवाददाता नागौर। लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections) की मतगणना को लेकर पिछले करीब डेढ़ महीने से इंतजार कर रहे नागौर लोकसभा क्षेत्र के मतदाताओं का अब इंतजार खत्म होने वाला है। मतगणना को अब भले एक दिन का समय शेष बचा है, लेकिन यह समय पिछले 43 दिन से भारी हो रहा है। हार-जीत को लेकर प्रत्याशियों से ज्यादा चर्चा उनके समर्थकों एवं मतदाताओं में हो रही है। कोई भाजपा प्रत्याशी डॉ. ज्योति मिर्धा को जिताने में लगा है तो कोई इंडिया गठबंधन के आरएलपी प्रत्याशी हनुमान बेनीवाल को मजबूत बता रहा है। जिताने वाले केवल इतना ही नहीं कह रहे कि फलां जीतेगा, उसके पीछे पूरा समीकरण भी फिट कर रहे हैं।
भाजपा के समर्थक जहां मोदी लहर के साथ कांग्रेस के लोगों की भीतरघात को अपनी जीत की वजह मान रहे हैं तो आरएलपी व कांग्रेस के लोग मोदी सरकार से नाराजगी के साथ कम मतदान प्रतिशत को अपना मजबूत पक्ष मान रहे हैं। उनका कहना है कि भाजपा के कोर वोटर मतदान केन्द्र तक नहीं पहुंचे, इसका सीधा फायदा आरएलपी को मिलेगा, वहीं भाजपा के लोगों का कहना है कि कांग्रेस के कुछ विधायक दिखावटी रूप से आरएलपी के साथ थे, जबकि अंदरूनी तौर पर उन्होंने साथ नहीं दिया। इसके साथ दोनों की हार-जीत को लेकर जाति वार वोटों के समीकरण भी बैठाए जा रहे हैं। खासकर नागौर लोकसभा क्षेत्र के सबसे बड़े वोट बैंक जाट समाज के वोटों को लेकर हार-जीत का अनुमान लगाया जा रहा है, कुछ लोग कह रहे हैं कि यदि जाटों के वोट आधे-आधे भी हुए तो भाजपा जीत जाएगी, वहीं कुछ लोगों का कहना है कि किसान आंदोलन व पहलवान बेटियों के आंदोलन को लेकर जिस प्रकार प्रधानमंत्री मोदी का रुख रहा, उससे जाट भाजपा से नाराज हैं, इसलिए जाटों के वोट भाजपा को नहीं मिले। वहीं भाजपा समर्थकों का कहना है कि जाटों ने भाजपा को नहीं ज्योति मिर्धा को वोट दिए हैं। यदि मिर्धा जीतती है तो नागौर की सरकार में भागीदारी होगी। ऐसे कई गणित हैं जो एक बार फिर गांव की चौपाल हो या फिर सोशल मीडिया, सरकारी कार्यालय हो या गली-मोहल्लों की बैठकें, हर जगह सेट किए जा रहे हैं।
Editorial

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