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गोद लिए बच्चे को दत्तक परिवार से मिली संपत्ति पर दावा नहीं कर सकते
By EditorialPublished on
गोद लिए गए बच्चे (adopted child) के बॉयोलॉजिकल रिलेटिव उसके दत्तक माता-पिता से विरासत में मिली संपत्ति पर दावा नहीं कर सकते। मद्रास हाई कोर्ट ने यह फैसला सुनाया।

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चेन्नई (एजेंसी)। गोद लिए गए बच्चे (adopted child) के बॉयोलॉजिकल रिलेटिव उसके दत्तक माता-पिता से विरासत में मिली संपत्ति पर दावा नहीं कर सकते। मद्रास हाई कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। साथ ही, इसे लेकर हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम 1956 का हवाला दिया। 5 जून को पारित आदेश में जस्टिस जीके इलानथिरायन ने कहा कि अधिनियम की धारा 12 में साफ किया गया है। यह स्पष्ट किया गया है कि एक बार जब किसी शख्स को गोद ले लिया जाता है, तो जन्म के परिवार से उसका संबंध टूट जाता है। ऐसे में गोद लिए गए व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके जैविक रिश्तेदार कानूनी उत्तराधिकार प्रमाणपत्र की मांग नहीं कर सकते।
अदालत ने अपने फैसले में कहा, यह स्पष्ट है कि गोद लेने की तारीख पर गोद लिए जाने वाले बच्चे के उसके जन्म के परिवार से संबंध टूट जाएगा। इसकी जगह गोद लेने वाले परिवार में गोद लेने से बने संबंधों को मान्यता दी जाएगी। अदालत वी शक्तिवेल की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसमें उसने अपने पहले चचेरे भाई (गोद लिया हुआ बच्चा) की ओर से छोड़ी गई संपत्ति पर दावा किया। इसे लेकर उन्होंने कानूनी उत्तराधिकार प्रमाण पत्र की मांग की थी।
आखिर किस मामले पर हो रही थी सुनवाई
शक्तिवेल के चचेरे भाई की 2020 में मृत्यु हो गई। उन्होंने गोद लिए गए व्यक्ति के जैविक भाई-बहनों की ओर से कानूनी उत्तराधिकार प्रमाण पत्र के दावे को भी चुनौती दी। शक्तिवेल के अनुसार, उनके नाना के 2 बेटे रामासामी और वरनावसी थे। लक्ष्मी नाम की उनकी एक बेटी भी थी। शक्तिवेल का जन्म तमिलनाडु के वरनावसी से हुआ था। रामासामी और उनकी पत्नी की कोई जैविक संतान नहीं हुई।
1999 में उन्होंने कोट्रावेल नाम के बच्चे को गोद लिया। कुछ साल बाद रामासामी और उनकी पत्नी की मौत हो गई। इसके बाद साल 2020 में कोट्रावेल की भी मृत्यु हो गई। शक्तिवेल ने कोट्रावेल की संपत्ति पर दावा करने के लिए कानूनी उत्तराधिकार को लेकर राजस्व विभाग से संपर्क किया। हालांकि, कोट्रावेल के जैविक रिश्तेदारों ने भी कानूनी उत्तराधिकार का दावा कर दिया।
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