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पावागढ़ पहाड़ी से हटाई गई जैन तीर्थंकरों की मूर्तियां दोबारा लगाई
By EditorialPublished on
गुजरात (Gujrat) के पावागढ़ (Pavagadh) पहाड़ी पर कालिका माता मंदिर (Kalika Mata Temple) की ओर जाने वाली प्राचीन सीढियों के बगल में स्थापित 500 साल पुरानी जैन तीर्थंकर नेमिनाथ (Jain Tirthankar Neminath) की प्रतिमाओं को हटाए जाने से जैन समाज (Jain society) में आक्रोश है। इसको लेकर गुजरात सरकार (Gujarat Government) ऐक्शन मोड में आ गई है।

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अहमदाबाद (एजेंसी)। गुजरात (Gujrat) के पावागढ़ (Pavagadh) पहाड़ी पर कालिका माता मंदिर (Kalika Mata Temple) की ओर जाने वाली प्राचीन सीढियों के बगल में स्थापित 500 साल पुरानी जैन तीर्थंकर नेमिनाथ (Jain Tirthankar Neminath) की प्रतिमाओं को हटाए जाने से जैन समाज (Jain society) में आक्रोश है। इसको लेकर गुजरात सरकार (Gujarat Government) ऐक्शन मोड में आ गई है।
गुजरात सरकार ने सोमवार को पंचमहल जिले के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सदियों पुरानी जैन मूर्तियों को पावागढ़ पहाड़ी पर कालिका माता मंदिर की ओर जाने वाली सीढ़ियों के पास उनके मूल स्थान पर दोबारा स्थापित करें। बता दें कि जैन समुदाय के लोगों ने कथित तौर पर इन प्राचीन प्रतिमाओं को हटाए जाने पर विरोध प्रदर्शन किया था। समुदाय के सदस्यों ने आरोप लगाया कि जैन तीर्थंकरों (सर्वोच्च आध्यात्मिक गुरुओं) की इन मूर्तियों को मंदिर ट्रस्ट ने एक जीर्णोद्धार परियोजना के तहत हटा दिया। हालांकि ट्रस्ट की ओर से सफाई दी गई कि सीढ़ियों पर एक पुराने रोड को हटाते समय उन्हें विस्थापित किया गया हो सकता है। ट्रस्ट ने यह भी कहा था कि ऐसा किसी दुर्भावना से नहीं किया गया था। जैन नेता दिनेश शाह ने बताया कि सोमवार की सुबह समुदाय के कुछ सदस्यों ने देखा कि मूर्तियाँ को साइड की दीवारों से हटाकर एक जगह पर रख दिया गया था। इन 6 से 7 मूर्तियों को हटाए जाने की जानकारी मिलने पर जैन समुदाय के सदस्यों और धार्मिक नेताओं ने वडोदरा, हलोल और सूरत में विरोध प्रदर्शन किया। जैन समाज के लोगों ने जिला कलेक्टरों को ज्ञापन भी सौंपा था। बताया जाता है कि गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की।
हर्ष संघवी ने सीएम के साथ बैठक के बाद इन मूर्तियों को उनके मूल स्थान पर दोबारा स्थापित किए जाने का आदेश दिया। सांघवी ने कहा कि ये मूर्तियां सदियों पहले वहां रखी गई थीं। लोग इन मूर्तियों की पूजा करते थे। इन मूर्तियों को हटाने की अनुमति कभी किसी ट्रस्ट या व्यक्ति को नहीं दी गई। इस कृत्य से कई लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।

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