school time
पुणे। विदर्भ (Vidarbha) को छोड़कर राज्यभर के स्कूल नये अकादमिक वर्ष के लिये शनिवार से खुल जायेंगे। नये साल में इन स्कूलों के लिये शुरुआती समय सुबह 7 बजे के बजाये सुबह 9 बजे कर दिया गया है। बच्चों की नींद पूरी हो, इस लिहाज से समय में यह बदलाव किया गया है । लेकिन इससे कई अन्य समस्यायें भी संभावित रूप से नजर आ रही हैं।
अधिकांश स्कूलों के प्रबंधन, शिक्षक और अभिभावक भी इस फैसले से नाखुश से नजर आ रहे हैं। समय में किये गये इस बदलाव को लेकर दुविधा की स्थिति भी नजर आ रही है। महाराष्ट्र राज्य प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन (Maharashtra State Primary Teachers Association) के अध्यक्ष वर्धा से विजय कोंबे के मुताबिक वे स्कूल जो इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के चलते दो शिफ्ट में चलते हैं, उनको इस नये नियम से काफी परेशानी होगी।
राज्य सरकार ने स्कूलों को फरवरी में ही निर्देश जारी कर दिया था कि प्रीस्कूल से कक्षा 4 तक के बच्चों के स्कूल खुलने का समय सुबह 7 बजे की बजाये सुबह 9 बजे किया जाये ताकि बच्चे पूरी नींद ले सकें। बच्चों के मानसिक विकास के लिये पूरी और स्वस्थ नींद अत्यंत आवश्यक है। अब इस फैसले पर एतराज जता रहे स्कूल अधिकारियों के मुताबिक, प्राइमरी क्लास एक अगर सुबह 9 बजे से शुरु होगी तो सेकंडरी क्लासेस खत्म होने में तो रात हो जायेगी।
ग्रामीण इलाकों में स्कूलों के लिये ही नहीं, बल्कि बच्चों के लिये भी यह असुविधाजनक होगा। कुछ शिक्षाविद डबल शिफ्ट में चलनेवाले स्कूलों के लिये समाधान भी पेश कर रहे हैं। उनके अनुसार अगर प्राइमरी
(primary)
के बच्चों को सुबह 9 बजे बुलाने से स्कूल की शिफ्ट में दिक्कत होती है और सेकंडरी स्कूल (secondary school) खत्म होने में रात होती है तो बेहतर है कि प्राइमरी के बच्चों के लिये स्कूल का समय सीधे दोपहर की दूसरी शिफ्ट में ही कर दिया जाये और सेकंडरी स्कूल के क्लास सुबह 7 बजे से ही शुरू कर दिये जायें। इससे प्राइमरी के लिये नियम का उल्लंघन भी नहीं होगा और शिफ्ट के समय को लेकर भी कोई समस्या नहीं होगा। कक्षा 4 के आगे के बच्चों के लिये स्कूल का समय सुबह 7 बजे से रखने पर कोई नियम भंग भी नहीं है और स्कूल को भी असुविधा नहीं होगी।
कई अभिभावक ऐसे भी हैं जो सुबह के स्कूल का समय ही सही मान रहे हैं। उनके मुताबिक, भारतीय दिनचर्या के हिसाब से यह सही समय है। अभिभावक भी बच्चों को सुबह स्कूल भेजकर अपने दफ्तर जा सकते हैं या फिर अन्य जरूरी काम निपटा सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों के लिये यह नियम खासा दिक्कतभरा साबित हो सकता है।
Editorial

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