MahaRERA housing projects
मुंबई। महाराष्ट्र रियल इस्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी (महारेरा) (MahaRERA) ने 1750 लैप्स हाउसिंग प्रोजेक्ट्स (housing projects) का रजिस्ट्रेशन सस्पेंड कर दिया है। इसके अलावा और 1137 प्रोजेक्ट्स के खिलाफ कार्यवाही की तैयारी भी की जा रही है।
मिली जानकारी के मुताबिक, 1750 प्रोजेक्ट्स में सबसे ज्यादा यानि 761 प्रोजेक्ट्स मुंबई मेट्रोपोलिटन रीजन से है जिसके बाद पुणे के 628 प्रोजेक्ट्स हैं। उत्तर महाराष्ट्र के 135, विदर्भ के 110, मराठवाडा के 100, दादरा नगर हवेली के 13 और दमन के 3 प्रोजेक्ट्स हैं जिनका रजिस्ट्रेशन सस्पेंड हुआ है।
महारेरा ने घर खरीदारों को सलाह दी है कि वे इन प्रोजेक्ट्स में सावधानी के साथ ही निवेश करें। बिल्डर्स को भी महारेरा रजिस्ट्रेशन के लिये आवेदन करते समय प्रोजेक्ट की प्रस्तावित समापन तिथि स्पष्ट रुप से उल्लेखित करनी चाहिये। यदि इस तारीख के भीतर प्रोजेक्ट पूरा होता है तो बिल्डर को महारेरा से ऑक्युपेंसी प्रमाणपत्र मिलेगा। अधूरे प्रोजेक्ट्स के लिये बिल्डर्स को या तो अपना रजिस्ट्रेशन रिनीव करना होगा या फिर डि-रजिस्ट्रेशन के लिये आवेदन करना होगा। यदि कोई कदम नहीं उठाया गया तो इन प्रोजेक्ट्स को लैप्स्ड घोषित कर दिया जायेगा। इसका नतीजा यह होगा कि बैंक खाते सील हो जायेंगे और विज्ञापन, मार्केटिंग और फ्लैट्स की बिक्री पर बैन लग जायेगा।
मिली जानकारी के मुताबिक, महारेरा ने 6638 प्रोजेक्ट्स के डेवलपर्स को कारण –बताओ नोटीस जारी किया है। इनमें से 3751 प्रोजेक्ट्स ने या तो ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट जमा कर दिया है, रजिस्ट्रेशन रिनीवल के लिये आवेदन किया है या फिर प्रोजेक्ट निरस्तीकरण के लिये याचिका दाखिल की है।
बाकी बचे 2887 प्रोजेक्ट्स में से 1750 का रजिस्ट्रेशन सस्पेंड हो गया है और 1137 प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन सस्पेंड होने की कतार में है। इनमें मुंबई में 48, उपनगरों में 115, ठाणे में 182 और पालघर में 216 प्रोजेक्टस हैं। महारेरा के मुखिया अजोय मेहता ने घर खरीदारों को गुमहार होने से बचने के लिये सावधान किया है। मेहता ने साफ किया है कि प्रोजेक्ट शुरु होने से लेकर खत्म होने तक डेवलपर के पास जितनी भी प्रोजेक्ट संबंधी जानकारी है उसे घर खरीदारों के लिये उपलब्ध कराया जाना चाहिये ताकि खरीदार सोच-समझकर फैसला ले सकें। यही वजह है कि महारेरा ने कई वैधानिक प्रावधान सुनिश्चित किये हैं जिनके जरिये विभिन्न स्तर पर रियल इस्टेट सेक्टर की नियमित निगरानी करने की कोशिश की जाती है।
Editorial

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