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स्मार्ट मीटर्स से बिजली के बिल में प्रति यूनिट होगी 30 पैसे की बढ़ोत्तरी
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महाराष्ट्र राज्य बिजली वितरण कंपनी लिमिटेड (Maharashtra State Electricity Distribution Company Limited) (एमएसईडीसीएल) ((MSEDCL)) ने पूरे महाराष्ट्र (Maharashtra) में 2.25 करोड़ बिजली के मीटर्स को स्मार्ट मीटर्स (smart meters) से बदलने का एक बेहद बड़ा और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट हाथ में लिया है। उपभोक्ता हितों के लिये काम करनेवाले संगठनों के एक समूह ने इस कदम का विरोध किया है। इन संगठनों के मुताबिक, इन नये हाई-फाई गैजेट्स के अधिष्ठापन से राज्य में अगले साल अप्रैल से बिजली ग्राहकों का बिजली बिल प्रति यूनिट कम

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प्रातःकाल संवाददाता मुंबई। महाराष्ट्र राज्य बिजली वितरण कंपनी लिमिटेड (Maharashtra State Electricity Distribution Company Limited) (एमएसईडीसीएल) ((MSEDCL)) ने पूरे महाराष्ट्र (Maharashtra) में 2.25 करोड़ बिजली के मीटर्स को स्मार्ट मीटर्स (smart meters) से बदलने का एक बेहद बड़ा और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट हाथ में लिया है। उपभोक्ता हितों के लिये काम करनेवाले संगठनों के एक समूह ने इस कदम का विरोध किया है। इन संगठनों के मुताबिक, इन नये हाई-फाई गैजेट्स के अधिष्ठापन से राज्य में अगले साल अप्रैल से बिजली ग्राहकों का बिजली बिल प्रति यूनिट कम से कम 30. पैसे बढ़ जायेगा।
एमएसईडीसीएल अधिकारियों के मुताबिक महाराष्ट्र बिजली नियामक आयोग बिजली की दरें निर्धारित करता है और इसी अनुसार बिजली की दरों में बढ़ोत्तरी करने या नहीं करने का कोई भी फैसला लिया जाता है। महाराष्ट्र में बिजली उपभोक्ताओं के लिये काम करनेवाले संगठन महाराष्ट्र वीज ग्राहक संघटना (Maharashtra Visa Consumer Association) के कार्यकर्ता प्रताप होगाडे के मुताबिक, राज्य में 2.25 करोड़ स्मार्ट मीटर्स लगाने का खर्च करीब 27 हजार करोड़ रुपये के आसपास आयेगा और इसका मतलब है कि प्रत्येक मीटर पर 12 हजार का खर्च आयेगा। होगाडे के मुताबिक, हर मीटर पर केंद्रीय अनुदान के तौर पर 900 रुपये मिलेंगे लेकिन बाकी की रकम का बोझ ग्राहकों पर ही पड़ेगा।
जाहिर है, इसके लिये बिजली की दर में प्रति यूनिट पर 30 पैसे की बढ़ोत्तरी करनी होगी। होगाडे ने राज्यभर के उपभोक्ता संगठनों से स्मार्ट मीटर्स का एकजुट विरोध करने की अपील की है। एमएसईडीसीएल के मुख्य प्रवक्ता भरत पवार के मुताबिक आवासीय, व्यावसायिक और अन्य उपयोगकर्ताओं के लिये स्मार्ट मीटर लगाने का जो खर्च आयेगा, उसके मुकाबले इससे उपभोक्ताओं को मिलनेवाला लाभ कहीं ज्यादा होगा। पवार ने स्मार्ट मीटर्स की उपयोगिता को स्पष्ट करते हुये बताया कि बिजली बिल की बकाया राशि जो कि 4 से 5 हजार रुपये है, की वसूली तेज रफ्तार से होगी और स्मार्ट मीटर्स से बिजली की चोरी भी बंद होगी। इससे बिजली वितरण में होनेवाला घाटा कम होगा और बिजली यूटिलिटी के लिये यह काफी फायदेमंद होगा। इसके चलते मीटर्स रीडर्स की आवश्यकता नहीं होगी और ना ही बिजली के बिल प्रिंट करने की जरूरत रहेगी। इससे करीब 150 करोड़ रुपये की अतिरिक्त बचत होगी।
स्मार्ट मीटर्स के अधिष्ठापन का खर्च उपभोक्ताओं से अग्रिम तौर पर नहीं वसूला जा रहा और इसलिये तत्काल ग्राहक को कोई अतिरिक्त अदायगी नहीं करनी है। कुल मिलाकर यह बिजली के प्रभावी वितरण और उपभोग को सुनिश्चित करेगा और साथ ही यह बिजली ग्राहकों के लिये भी फायदेमंद साबित होगा।

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