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आचार्य महाश्रमण का दीक्षा महोत्सव कांदिवली में मनाया
By EditorialPublished on
मुंबई। तेरापंथ भवन कांदिवली में आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) का 50वाँ दीक्षा कल्याण महोत्सव मुनि कमल कुमार स्वामी, शासनश्री साध्वी विद्यावती द्वितीय, साध्वी शकुंतला कुमारी एवं साध्वी मंगलप्रज्ञा के सानिध्य में मनाया गया।

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मुंबई। तेरापंथ भवन कांदिवली में आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) का 50वाँ दीक्षा कल्याण महोत्सव मुनि कमल कुमार स्वामी, शासनश्री साध्वी विद्यावती द्वितीय, साध्वी शकुंतला कुमारी एवं साध्वी मंगलप्रज्ञा के सानिध्य में मनाया गया।
अपने आराध्य के प्रति शुभकामना व्यक्त करते हुए मुनि कमल कुमार स्वामी ने कहा कि आचार्य महाश्रमण का व्यक्तित्व विराट और विशाल है। उनके आभामंडल में रहने व मुख मुद्रा के दर्शन मात्र से सारी थकान दूर हो जाती है। उनके जीवन में विद्या, विवेक, विनय का सुंदर संगम है। वे प्रबल प्रतापी, प्रशांतमना, प्रबल पुरुषार्थी प्रयोग धर्मा हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कल्याण महोत्सव के अवसर पर संकल्प करेंगे कि हमारा हर कदम उनके इशारों पर, उनके विचारों पर, उनके शब्दों पर, उनके आदर्शो पर चले। उन्होंने आचार्यश्री की अभ्यर्थना में कविता भी प्रस्तुत की। साध्वी प्रमुखा विश्रुत विभा के चयन दिवस पर उन्होंने कहा आज का दिवस अति महत्वपूर्ण है क्योंकि आचार्यश्री का दीक्षा दिवस और साध्वी प्रमुखा का चयन एक ही दिन को हुआ।
शासनश्री साध्वी विद्यावती की सहवर्ती साध्वियों ने उनके द्वारा रचित गीत का संगान किया। साध्वी प्रियंवदा ने कहा कि आचार्य महाश्रमण गुणों के भंडार है, अनुशासन प्रिय है। उनकी कथनी और करनी में एकरुपता है। गुरुदेव के कल्याण महोत्सव की सार्थकता तभी होगी जब हम तप त्याग की भेट चढ़ाएंगे। साध्वी शकुंतला कुमारी ने कहा कि आचार्य महाश्रमण करुणा के सागर है, हर व्यक्ति की पीड़ा को अपनी पीड़ा समझते हैं। साध्वी सोमलता के जीवन प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरु हो तो आचार्य महाश्रमण जैसे हो। साध्वी डा मंगल प्रज्ञा ने कहा कि आचार्य महाश्रमण अनगिन गुणों के पर्याय है। उन्होंने उनकी आचार निष्ठा व संयम निष्ठा को बेजोड़ बताया। मुमुक्षु जीवन के अनुभव को साझा करते हुए कहा कि मात्र इक्कीस वर्ष की आयु में मुमुक्षुओं को अध्ययन कराना गुरु के अमिट विश्वास को दर्शाता है। साध्वीश्री ने कहा कि हमने देखा कि आचार्य प्रवर ने मूर्त भाग्य और अमूर्त भाग्य की नई व्याख्या की। आवश्यकता है संयम के शिखर पुरुष के संयम कल्याण महोत्सव पर हम सभी संयम चेतना के विकास के लिए भावो को पवित्र बनाए रखें। उन्होंने साध्वी प्रमुखा को भी बधाई दी। साध्वी संचित यशा साध्वी राजुलप्रभा ने विचार रखे। साध्वी चैतन्य प्रभा साध्वी सुदर्शन प्रभा साध्वी शोर्य प्रभा साध्वी राजुल प्रभा साध्वी जागृत प्रभा साध्वी मृदुयशा ने प्रस्तुति दी। साध्वी प्रेरणाश्री ने मुक्तक, साध्वी जागृत प्रभा साध्वी मृदु यशा ने कविता के माध्यम से प्रस्तुति दी। साध्वी रक्षित यशा ने गीतिका प्रस्तुत की। मुनि अमन कुमार मुनि मुकेश कुमार ने गुरु भक्ति के संस्मरण सुनाते हुए संगीत की स्वर लहरियों से अर्चना की।
मुनि नमि कुमार ने कहा कि मेरे मस्तक पर, मेरे संयम प्रदाता का, सरलमना गुरुदेव का, मुनि कमल कुमार का वरद हस्त है। गुरुदेव के दीक्षा दिवस पर मुनि नमि कुमार ने नौ की तपस्या का प्रत्याख्यान किया।
ज्ञानशाला के बच्चों व साध्वी वृंद ने आराध्य की अभिवंदना में सामूहिक गीत की प्रस्तुति दी। रेणुका कोठारी ने मंगलाचरण किया। तेरापंथी सभा मुंबई के कार्याध्यक्ष नवरत्न गन्ना ने पूज्य प्रवर की अभिवंदना करते हुए स्वागत किया। मंत्री दीपक डागलिया, तुलसी महाप्रज्ञ फाउंडेशन के मंत्री प्यारचंद मेहता, युवक परिषद कांदिवली के अध्यक्ष नवनीत कच्छारा ने आस्था के भाव समर्पित किए। उपस्थित श्रावक श्राविकाओ ने दीक्षा कल्याण महोत्सव पर उपवास, बेला, तेला, पचरंगी, तपस्या मौन साधना सामायिक में संभागिता दर्ज की।

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