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राजस्थान की 5 सीटों पर आजाद ने उम्मीदवार उतारे
By EditorialPublished on
राजस्थान (Rajasthan) में चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) की आजाद समाज पार्टी (Azad Samaj Party) (एएसपी) (ASP) ने राजस्थान की 5 लोकसभा सीटों - टोंक-सवाई माधोपुर (Tonk-Sawai Madhopur), अजमेर (Ajmer), जोधपुर (Jodhapur), बाड़मेर (Barmer) और जालौर (Jalore) पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। टोंक-सवाई माधोपुर से विजेंद्र सिंह मीणा, अजमेर से जितेंद्र कुमार बोयत, आनंदपाल प्रभुराम चौहान को जोधपुर से, प्रभुराम गोयल बाड़मेर और जालौर से मोतीलाल हीरागर को उम्मीदवार बनाया है। इन सीटों में बाड़मेर सीट पर रवींद्र सिंह भाटी

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कार्यालय संवाददाता जयपुर। राजस्थान (Rajasthan) में चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) की आजाद समाज पार्टी (Azad Samaj Party) (एएसपी) (ASP) ने राजस्थान की 5 लोकसभा सीटों - टोंक-सवाई माधोपुर (Tonk-Sawai Madhopur), अजमेर (Ajmer), जोधपुर (Jodhapur), बाड़मेर (Barmer) और जालौर (Jalore) पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। टोंक-सवाई माधोपुर से विजेंद्र सिंह मीणा, अजमेर से जितेंद्र कुमार बोयत, आनंदपाल प्रभुराम चौहान को जोधपुर से, प्रभुराम गोयल बाड़मेर और जालौर से मोतीलाल हीरागर को उम्मीदवार बनाया है। इन सीटों में बाड़मेर सीट पर रवींद्र सिंह भाटी के निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन करने के बाद मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है, ऐसे में चन्द्रशेखर की पार्टी ने भी उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।
जबकि टोंक-सवाई माधोपुर में भाजपा के सुखबीर सिंह जौनपुरिया और कांग्रेस (Congress) के हरीश चंद्र मीणा के बीच सीधा मुकाबला होने की संभावना है। जोधपुर से गजेंद्र सिंह शेखावत भाजपा (BJP) के उम्मीदवार हैं, जबकि कांग्रेस ने यहां से करण सिंह उचिराड़ा को मैदान में उतारा है। जालोर और अजमेर सीट पर भी भाजपा और कांग्रेस प्रत्याशियों के बीच सीधा मुकाबला होने की उम्मीद है।
बसपा ने सभी सीटों पर उतारे उम्मीदवार
बहुजन समाज पार्टी (Bahujan samaj party) भी राजस्थान की सभी लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने जा रही है। इसके लिए पार्टी ने सभी 25 लोकसभा सीटों पर उम्मीदवारों के नाम फाइनल कर दिए हैं। बसपा उम्मीदवारों के चुनाव में आने के बाद कई सीटों पर मुकाबला रोचक हो गया है। इससे कांग्रेस और भाजपा दोनों के उम्मीदवारों को नुकसान होने की संभावना है। अलवर से बसपा ने मुस्लिम कैंडिडेट को चुनावी मैदान में उतारकर कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है। वहीं दलित वोट अगर बसपा में शिफ्ट होते हैं तो भाजपा को भी कई सीटों पर मुसीबत झेलनी पड़ सकती है।

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