Pratahkal-Acharya Mahashraman-Pune
पुणे । आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) ने गुरुवार प्रातः पुणे (Pune) शहर के बाहरी भाग में स्थित कल्याणी नगर से प्रस्थान किया। वे 14 किलोमीटर का विहार कर भारतीय जैन संगठना शैक्षणिक पुनर्वसन प्रकल्प पहुंचे।
यहाँ अपने प्रवचन में उन्होंने कहा कि हमारे जीवन में शरीर और जीव- दो तत्त्व बताए गए हैं। शास्त्रकार ने इस शरीर को एक नौका बताया और जीव को नाविक बताया तथा संसार को सागर बताया। इस संसार रूपी सागर को जीव शरीर रूपी नौका से तरने का प्रयास करे तो वह इस संसार से पार पा सकता है। इस नौका को छिद्र रहित रखने वाला मानव संसार सागर को पार कर सकता है। शरीर रूपी नौका में यदि पापों का छिद्र हो गया तो, आदमी इस संसार रूपी सागर में फंस जाता है। इसलिए आदमी को अपने जीवन को पाप रहित बनाने का प्रयास करना चाहिए। पापों से बचते हुए संयम और तप की साधना हो, धर्म की आराधना हो तो प्राणी संसार समुद्र से पार पा सकता है।

Editorial

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