metro
■ हाई स्पीड वंदे मेट्रो को इंटरसिटी की तर्ज पर चलाया जाएगा
■ परीक्षण के लिए अभी रूट का चयन नहीं, 50 ट्रेनें तैयार, परीक्षण के बाद 400 वंदे मेट्रो चलाने की तैयारी
■ मेट्रो की तर्ज पर चलाई जाने वाली ये ट्रेनें पहले चरण में देश के 124 शहरों को आपस में जोड़ेंगी
नई दिल्ली (एजेंसी)। दैनिक रेल यात्रियों की परेशानियों को देखते हुए रेलवे वंदे मेट्रो ट्रेन (vande metro train) चलाने जा रहा है। निर्माण पर तेजी से काम किया जा रहा है। मेट्रो (metro) की तर्ज पर चलाई जाने वाली ये ट्रेनें पहले चरण में देश के 124 शहरों को आपस में जोड़ेंगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnav)
व बताया कि पहली वंदे मेट्रो ट्रेन जुलाई से पटरी पर दौड़ने लगेगी। प्रारंभ में इसे परीक्षण के तौर पर दो-तीन महीने चलाया जाएगा।
परीक्षण के लिए अभी रूट का चयन नहीं किया गया है। अभी 50 ट्रेनें बनकर तैयार हैं। परीक्षण के दौर से गुजरते ही चार सौ अतिरिक्त वंदे मेट्रो का आर्डर दिया जाएगा। अगले दो-तीन वर्षों में चार सौ वंदे मेट्रो चलाने की तैयारी है। वंदे मेट्रो में कोचों की संख्या जरूरत के अनुसार होगी। रेलवे की तैयारी चार, पांच, 12 और 16 कोच की है।
जिस रूट पर यात्री ज्यादा होंगे, वहां 16 कोच होंगे। जहां कम यात्री होंगे वहां 4 कोच की ट्रेन होगी। पहली स्वदेशी सेमी हाई स्पीड बंदे मेट्रो को इंटरसिटी की तर्ज पर चलाया जाएगा। इनके जरिये उन शहरों को जोड़ा जाएगा, जो अधिकतम ढाई सौ किमी के फासले पर होंगे। ट्रेनों की अधिकतम गति 130 किमी प्रति घंटा होगी और किराया सामान्य होगा ।
2031-32 तक खत्म होगी वेटिंग टिकट की समस्या
ट्रेनों में वेटिंग टिकट (waiting ticket) की समस्या के बारे में रेल मंत्री ने बताया कि कोच, लोको और पटरियों के निर्माण का काम जब पूरा हो जाएगा, तब ट्रेनों में वेटिंग की समस्या खत्म हो जाएगी। इसमें कम से कम सात से आठ वर्ष लगेंगे। मतलब 2031-32 तक ट्रेनों में वेटिंग टिकट की समस्या खत्म हो जाएगी। सभी को कन्फर्म टिकट मिलने लगेगा। अभी प्रत्येक वर्ष 5 हजार किमी नई पटरियां बिछाई जा रही हैं। अगले वर्ष तक इसे बढ़ाकर 6 हजार प्रति वर्ष करने का लक्ष्य है।

Editorial

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