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पुणे। आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) शनिवार को अपनी धवल सेना (Dhaval Sena) के साथ पिंपरी चिंचवड़ (Pimpri Chinchwad) पहुँचे तो स्वागत में श्रद्धालु उमड़ पड़े। आचार्यश्री पिंपरी चिंचवड़ में होली सहित चार दिवसीय प्रवास है।

शनिवार प्रातः आचार्यश्री ने ताथवड़े से प्रस्थान किया और 7 किलोमीटर का विहार कर पिंपरी चिंचवड़ पहुंचे। मार्ग में जैन विद्या प्रसारक मंडल (Jain Vidya Prasarak Mandal) द्वारा संचालित स्कूल के बच्चों ने स्वागत किया। यहां आयोजित कार्यक्रम में आचार्यश्री ने बच्चों को आशीर्वाद प्रदान किया।

उन्होंने कहा कि आदमी सुखी जीवन जीना चाहता है। कई सुख की चाह होते हुए भी आदमी को दुःख भी प्राप्त हो जाते हैं। दुनिया में अनेक प्रकार के दुःख होते हैं। शारीरिक कष्ट भी प्राप्त होता है। बुढ़ापा दुःख देने लगता है, बीमारी दुःख का कारण बनती है। कई बार आदमी मानसिक दुःख से व्यथित होता है। सभी दुःखों में मूल में मोहनीय कर्म होता है, जिसके कारण दुःख पैदा होता है। शास्त्रों में सुखी रहने सूत्र बताया गया कि अपने आपको को तपाओ। सुकुमारता को छोड़कर कठोर जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए। सुविधावादी नहीं श्रमशील जीवन जीने का अभ्यास करना चाहिए।

कार्यक्रम को साध्वीप्रमुखा ने भी उद्बोधित किया। तेरापंथी सभा (Terapanthi Sabha)-पिंपरी चिंचवड़ के अध्यक्ष प्रकाश गांधी ने भी विचार रखे।
Editorial

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