Pratahkal-Maharashtra-Jain-Acharya Mahashraman
मुंबई । आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) अपनी धवल सेना के साथ गुरुवार को माणगांव से पुणे (Pune) की ओर अग्रसर हुए। दस किलोमीटर का विहार कर आचार्य महाश्रमण ग.रा. मेथा विद्यालय पहुंचे। यहाँ आयोजित प्रवचन में उन्होंने कहा कि जीवन में दुख भी आते हैं। बीमारी, मृत्यु, जन्म और बुढ़ापा दुःख है। आदमी दुःखों से छुटकारा पाना चाहता है तथा सुखी जीवन जीना चाहता है। आदमी जीवन में ऐसा क्या करे कि उसका वर्तमान जीवन भी अच्छा हो और आगे वाला जीवन भी अच्छा बन सके। आत्मा और शरीर का योग ही जीवन है। मृत्यु है तो जन्म की भी बात होती है। इसलिए पुनर्जन्मवाद का सिद्धांत भी है। कर्मफल के सिद्धांत के अनुसार आदमी जैसा कर्म करता है, उसका फल भी उसे वैसा ही प्राप्त होता है। बुरा कर्म हो तो उसका फल भी बुरा होता है और भला कार्य है तो परिणाम भी भला ही होता है। आदमी को बुरे कार्यों व पापों से बचने के लिए संयमित जीवन जीने के लिए आत्मानुशासन करने की आवश्यकता होती है।

Editorial

Editorial

Next Story