Khatudham
उदयपुरवाटी (प्रा.सं.)। फाल्गुन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा शुरु होते ही श्याम भगत खाटू धाम (Shyam Bhagat Khatu Dham) में पदयात्रा (padayatra) को लालायित हो कर भक्ति भाव से श्याम नाम के निशान और स्वयं श्याम रंग की भक्ति में डूबे हुए पदयात्रा के निकल पड़ते हैं। फाल्गुन माह इस प्रतिपदा से शुरू हुआ यह सिलसिला मुख्य मेले के अंतिम दिन एकादशी तक अनवरत जारी रहेगा । इन तीन दशको में दर्शकों की संख्या में लगातार वृद्धि होने के कारण खाटूधाम मेला (Khatudham Fair) प्रबंध समिति ने इसमें संशोधन किया। पहले दर्शकों की संख्या सीमित होने के कारण यह मेला एक दिवस ही होता था, इसके बाद इसे बढ़ा कर 3 दिन का कर दिया गया । अब यह मेला 11 दिवस तक चलता है ।
पहले मंदिर तक ही था मेला अब रींगस तक फैला आस्था का रैला
3 दशक पहले श्रद्धालुओं की तादाद सीमित होने के कारण मुख्य मेला एकादशी को खाटू धाम मंदिर (Khatu Dham Temple) तक ही सीमित रहता था। ज्यों-ज्यों हारे का सहारा श्याम, शीश दानी बर्बरीक के बारे पता चलता गया त्यों-त्यों श्रद्धालुओं के पैर खाटू धाम की ओर बढते गये और यह संख्या 7 लाख पार होने लगी तब इस मेले की अवधि बढा कर 3 दिवस की करनी पड़ी। पिछली बार यह संख्या 8 लाख से ऊपर होने का आकंलन किया गया तो इस बार से मेले की अवधि 11 दिन की कर दी गई ।
खाटूधाम ने पर्यटन में बनाई पहचान हजारों को मिला रोजगार
खाटूधाम पहुचने के रींगस से रेल सेवा है और बस सुविधा से भी जुड़ा हुआ है। फाल्गुन के अलावा रविवार के दिन भी वहां अच्छी संख्या में श्रद्धालु पहुंते रहते हैं। बीते बीस बरसों में नया मंदिर बनने, विश्राम गृहों और होटलों की संख्या में बढोतरी होते रहने से खाटूधाम ने नया रूप ले लिया । बरसों पहले मंदिर तक पहुंचने के लिए कच्चा रास्ता था । अब वहां चौड़ी और पक्की सड़कें बिछ गई है। और अब वहां 20 हजार से अधिक लोग अलग-अलग तरह का कारोबार कर रहे हैं। इस साधारण से मेले का नाम लक्खी मेला हो गया। पदयात्री भगतों की इस कड़ी में श्री श्याम भक्त मंडल के सौजन्य से 18 मार्च को उदयपुरवाटी से खाटूधाम के लिए दोपहर 1 बजे निशान पदयात्रा शुरू होगी। इस पदयात्रा की पूर्व संध्या 17 मार्च को 9 बजे श्री श्याम मंदिर में निशानों की पूजा व श्याम बाबा के कीर्तन का आयोजन किया जायेगा ।
Editorial

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